1 मिनट में उजड़ा पूरा गांव: किश्तवाड़ बादल फटने की घटना
14 अगस्त 2025, दोपहर का समय। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चशोटी गांव में कुछ ऐसा हुआ जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। वो सिर्फ बादल नहीं फटा था, वो किसी की ज़िंदगी की आखिरी चाय थी, किसी की मां की पुकार, किसी के बच्चे की मुस्कान… और अगले ही पल सब मलबे में दब गया।

इस दिन चशोटी गांव में मचैल माता यात्रा के हज़ारों श्रद्धालु मौजूद थे। बसें खड़ी थीं, टेंट लगे थे, भंडारे चल रहे थे। माहौल श्रद्धा और उमंग से भरा था, लेकिन ऊपर पहाड़ों में जो घट रहा था, उसने कुछ ही मिनटों में इस गांव को मातम में बदल दिया।
तबाही की वो 60 सेकंड की कहानी
करीब 12:30 बजे, पहाड़ के ऊपरी हिस्से में बादल फटा। कोई चेतावनी नहीं, कोई तैयारी नहीं।
मोहलाल, जो गांव के ही निवासी हैं, बताते हैं:
“मैं लंगर में सेवा कर रहा था। अचानक शोर सुनाई दिया, जैसे कोई तेज़ झरना टूट पड़ा हो। मैंने पीछे देखा तो पानी और मलबे का समंदर उतरता दिखा। बस चिल्लाया – भागो! लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”
पानी नहीं आया था, वो मौत की एक बर्फीली, कीचड़ से सनी दीवार थी, जो पूरे गांव को बहाकर ले गई। एक मिनट में जो खड़ा था, वह गिर चुका था। जहां श्रद्धा थी, वहां सिर्फ चीत्कार रह गई।

आंखों से देखे डरावने दृश्य
शवों के फेफड़ों में कीचड़ भरा मिला। कुछ बच्चों के शरीर पहाड़ी चट्टानों से टकराकर कई मीटर दूर मिले। टेंट, दुकानें, बसें—सब बह गए। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ, लेकिन रास्ते कीचड़ और मलबे से भरे थे। स्थानीय लोग, पुलिस और सेना के जवानों ने पीठ पर लादकर लोगों को अस्पताल तक पहुंचाया।
संवेदनाएं भी झुकीं, इंसानियत भी जागी
जम्मू के GMC हॉस्पिटल में 50 बिस्तरों का वार्ड तैयार किया गया। PGI चंडीगढ़ से डॉक्टरों की टीम भेजी गई। सरकार, प्रशासन, आम लोग—हर कोई मदद के लिए आगे आया। प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और LG मनोज सिन्हा ने स्थिति की निगरानी की और मदद का भरोसा दिलाया।
मृतकों और बचाए गए लोगों की विसंगति
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 38 से 46 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें दो CISF जवान भी शामिल हैं हादसे में अब तक 160–167 लोग बचाए गए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है कुछ स्रोतों के मुताबिक 200 से अधिक लोग लापता हैं, संख्या में बढ़ोतरी की आशंका है

राहत और बचाव ऑपरेशन में NDRF, SDRF, पुलिस, सेना, स्थानीय स्वयंसेवक और एयर फोर्स की टीमें शामिल हैं। मौसम, कठिन भौगोलिक स्थितियाँ और संपर्क टूटे होने की वजह से प्रयास धीमे किंतु लगातार जारी हैं प्रशासन ने पड्डर में हेल्पडेस्क और कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, ताकि परिवारों को सहायता और जानकारी मिल सके
त्रासदी के पीछे का भौगोलिक स्थिति
चशोती गांव समुद्र तल से लगभग 9,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह मचैल माता यात्रा का अंतिम मोटर मार्ग पर आने वाला बिंदु है, जहां से श्रद्धालु 8.5 किलोमीटर तक पैदल यात्रा करते हैं। भारी बारिश, ढलानों और ग्लेशियर के कारण यह क्षेत्र क्लाउडबर्स्ट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है
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