Digital Deaddiction Program : डी-डैड कार्यक्रम से हजारों को मिला राहत
Digital Deaddiction Program : डिजिटल युग में बढ़ती लत के चलते युवा पीढ़ी में बढ़ती चिंताओं के बीच, केरल ने एक अभिनव पहल के साथ आगे बढ़ते हुए देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण स्थापित किया है। केरल पुलिस द्वारा जनवरी 2023 में शुरू किया गया डी-डैड (डिजिटल डी-एडिक्शन) कार्यक्रम अब तक सैकड़ों लोगों को डिजिटल लत से बाहर निकालने में सफल रहा है।
डी-डैड कार्यक्रम क्या है?
डी-डैड एक पुलिस-प्रारंभिक डिजिटल डिटॉक्स पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं को मोबाइल फोन, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया की लत से छुटकारा दिलाना है। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों को अत्यधिक डिजिटल निर्भरता से बचाने पर केंद्रित है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए थेरेपी सत्रों और परामर्श भी प्रदान करता है।
अब तक की सफलता की कहानी
- 775 बच्चों को डिजिटल लत से मुक्ति दिलाई गई।
- 1739 लोगों ने डी-डैड कार्यक्रम के तहत सहायता मांगी है।
- कई बच्चों के लिए काउंसलिंग सत्र जारी हैं।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि केरल का यह कार्यक्रम कितनी प्रभावशाली तरीके से काम कर रहा है और युवा पीढ़ी के जीवन में बदलाव ला रहा है।
डिजिटल लत के कारण बन रही समस्याएं
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक मोबाइल फोन उपयोग और ऑनलाइन गतिविधियों के कारण बच्चों में कई मानसिक और व्यवहारिक समस्याएं देखी गई हैं
- आक्रामकता और चिड़चिड़ापन
- अवसाद और चिंता की प्रवृत्ति
- आत्महत्या के विचार और मानसिक तनाव
- पढ़ाई में ध्यान की कमी
14 से 17 वर्ष की आयु के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। इस आयु वर्ग में लड़के ऑनलाइन गेमिंग के आदी हैं, जबकि लड़कियां सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताती हैं।
माता-पिता के लिए हेल्पलाइन
चिंतित माता-पिता और अभिभावक अब डी-डैड हेल्पलाइन – 9497900200 पर संपर्क कर सकते हैं और पुलिस से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह हेल्पलाइन परिवारों को डिजिटल लत के संकेतों को पहचानने और उचित मार्गदर्शन देने में मदद करती है।
डी-डैड कार्यक्रम की विशेषताएं
1. मनोवैज्ञानिक परामर्श: डिजिटल लत के मानसिक प्रभाव को समझने के लिए विशेषज्ञों के साथ सत्र।
2. डिजिटल डिटॉक्स कार्यशालाएं: बच्चों को ऑफलाइन गतिविधियों में शामिल करने के लिए गतिविधियां और कार्यशालाएं।
3. माता-पिता के लिए मार्गदर्शन: अभिभावकों को बच्चों की डिजिटल आदतों को नियंत्रित करने के तरीके सिखाना।
4. स्कूल सहयोग: स्कूलों के साथ मिलकर डिजिटल शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
केरल के इस प्रयास से क्या सीखा जा सकता है?
केरल का यह कार्यक्रम देशभर के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है। डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। यह पहल दिखाती है कि सरकार, समुदाय और परिवार के संयुक्त प्रयासों से डिजिटल लत पर काबू पाया जा सकता है।
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक नई राह
केरल का डी-डैड कार्यक्रम एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे नीति और समुदाय मिलकर युवाओं के जीवन को बेहतर बना सकते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के डिजिटल उपयोग पर नजर रखनी चाहिए और आवश्यक होने पर विशेषज्ञों से परामर्श करना चाहिए।
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