Kedarnath Panchmukhi idol Omkareshwar Temple Ukhimath : ओंकारेश्वर मंदिर,उखीमठ में बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली का विराजमान होना धार्मिक और स्थानीय संस्कृति की बड़ी घटना है। डोली के विराजमान होने के साथ ही केदारनाथ धाम के भक्तों के लिए अगले छह महीनों तक मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, और शीतकालीन गद्दीस्थल पर पूजा-अर्चना आरंभ होती है.
पंचमुखी डोली का आगमन
बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली यात्रा शुरू कर फाटा, ब्यूंग, नारायणकोटी और गुप्तकाशी जैसे पड़ावों से होकर ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पहुंची। मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं द्वारा नारे, फूलों की वर्षा, स्थानीय वाद्य यंत्र और आर्मी बैंड की मधुर धुनों के साथ डोली का भव्य स्वागत किया गया.
शीतकालीन पूजा का शुभारंभ
अब छह माह तक बाबा केदारनाथ की पूजा, आरती, धार्मिक विधान उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में ही सम्पन्न होंगे. केदारनाथ धाम के रावल ने स्वर्ण मुकुट धारण कर पूजा-अर्चना का संकल्प लिया। शीतकाल में पंचमुखी डोली की पूजा, सांयकालीन और शयन आरती के साथ प्रशासन ने सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं भी की गई हैं.
धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक जुड़ाव
पंचमुखी चल विग्रह डोली का हर वर्ष शीतकालीन गद्दीस्थल तक आगमन उत्तराखंड की परंपरा का अभिन्न अंग है। स्थानीय पंथेर पुरोहित, तीर्थ पुरोहित समाज और क्षेत्रीय विधायक व प्रशासन के प्रतिनिधि इस आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। यह सिर्फ पूजा का स्थान-परिवर्तन नहीं, बल्कि लोक-आस्था, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक सामाजिकता का उत्सव है.
READ MORE :उत्तराखंड ने औद्योगिक विकास में लगाई छलांग, लोगों को मिला रोजगार
छह महीने तक नहीं होंगे केदारनाथ धाम के दर्शन
अब बाबा केदार के भक्तों को आगामी छह माह तक केदारनाथ धाम के कपाट बंद रहने के चलते सिर्फ ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में ही भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना का अवसर मिलेगा. अप्रैल-मई में कपाट पुनः खुलने तक भक्तों का केंद्र यही रहेगा।
बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह डोली का ओंकारेश्वर मंदिर में विराजित होना क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गोरव का क्षण है. केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन गद्दीस्थल में भगवान की पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन नए उत्साह के साथ प्रारंभ हो गए हैं।
