हर दिशा में अलग रूप, हर रंग में शिव
kedarnath panchmukhi doli yatra 2025: उत्तराखंड की पवित्र घाटियों में इन दिनों एक अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की पंचमुखी चल उत्सव डोली रामपुर पहुंच चुकी है। “हर-हर महादेव” के जयकारों के बीच भक्तों ने श्रद्धा और आस्था से बाबा का स्वागत किया।

पंचमुखी डोली: शिव के पांच रूपों का प्रतीक
इस डोली को पंचमुखी कहा जाता है क्योंकि इसमें भगवान शिव के पांच अलग-अलग मुखों का दर्शन होता है—पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊपर की दिशा में। हर मुख एक अलग रंग और भाव लिए होता है, जो शिव के विविध रूपों को दर्शाता है।
- पूर्व दिशा: ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक
- पश्चिम दिशा: संहार और न्याय का रूप
- उत्तर दिशा: करुणा और शांति
- दक्षिण दिशा: शक्ति और तप
- ऊपर की दिशा: ब्रह्म तत्व, जो सबमें व्याप्त है
‘ओम नम: शिवाय’ की गूंज और आध्यात्मिक ऊर्जा
जब डोली यात्रा निकलती है, तो “ओम नम: शिवाय” का मंत्र हर कदम पर गूंजता है। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है जो भक्तों को शिव के करीब ले जाती है। माना जाता है कि इस यात्रा में शामिल होने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
गुप्तकाशी की ओर 17 किलोमीटर की यात्रा
आज बाबा केदार की डोली 17 किलोमीटर की कठिन लेकिन पवित्र यात्रा कर गुप्तकाशी पहुंचेगी। यह वही स्थान है जहाँ पांडवों को शिव के दर्शन नहीं हुए थे, और उन्होंने तपस्या की थी। डोली यात्रा का हर पड़ाव एक कथा, एक आस्था और एक अनुभव से जुड़ा होता है।
कपाट बंद, लेकिन आस्था रहती है
केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो चुके हैं, लेकिन बाबा की डोली के साथ भक्तों की आस्था अब भी जीवित है। ऊखीमठ में ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा की पूजा अगले छह महीने तक होती रहेगी। यह परंपरा सदियों पुरानी है, और हर साल हजारों श्रद्धालु इसका हिस्सा बनते हैं।
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