kedarnath disaster 2013 skeletons recovered missing victims: हजारों लोग अब भी लापता
16 जून 2013 की रात को आई भयंकर जलप्रलय ने उत्तराखंड के केदारनाथ को पूरी तरह तबाह कर दिया था। यह एक ऐसी आपदा थी, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जलप्रलय ने न सिर्फ केदारनाथ मंदिर परिसर, बल्कि पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। हजारों लोग लापता हो गए, सैकड़ों लोग मारे गए, और आज तक उन लाखों परिवारों के दिलों में वही दर्द और टीस बाकी है।

अब, 12 साल बाद, राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा फिर से कंकालों की खोज शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। केदारनाथ में हुई इस आपदा में लापता हुए 3075 लोगों का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है। हालाँकि, सरकार ने इस संबंध में कई बार सर्च टीम भेजी है, लेकिन अब तक कोई बड़ा सफलता हाथ नहीं लगी है।
लापता हुए 3075 लोग, पहचान नहीं हो पाई 702 मृतकों की
केदारनाथ आपदा के बाद 2014 में और फिर 2016 में कंकालों की खोज की गई थी। इस दौरान कुछ कंकाल तो बरामद हुए, लेकिन वे मृतकों के परिजनों से पहचानने में सक्षम नहीं हो सके। 2020 में एक बार फिर चट्टी और गौमुखी क्षेत्र में खोजी दल ने 703 नरकंकाल बरामद किए थे, जिनके डीएनए टेस्ट के बाद कुछ की पहचान हुई, लेकिन बहुत से शवों का मिलान नहीं हो पाया।
इस बार, राज्य सरकार ने फिर से सर्च टीमें भेजने की योजना बनाई है, ताकि उन 702 मृतकों की पहचान की जा सके, जिनके डीएनए नमूने आज भी पुलिस के पास हैं। सरकार की ओर से यह पुष्टि की गई है कि सर्च टीमें फिर से केदारनाथ के आसपास के पहाड़ी मार्गों पर खोज करने के लिए भेजी जाएंगी।
डीएनए परीक्षण: पहचान का एकमात्र रास्ता
केदारनाथ आपदा में मारे गए लोगों के अवशेषों की पहचान अब डीएनए परीक्षण के माध्यम से की जा रही है। करीब 6000 लोगों ने अपनी डीएनए रिपोर्ट सरकार को दी थी, लेकिन अब तक इनकी मदद से उन 702 मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। सरकार की ओर से बार-बार प्रयास किए गए हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है।
2016 और 2019 में आए थे हाईकोर्ट के निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2016 और 2019 में राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह लापता लोगों के अवशेषों की तलाश करे और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाए। इसके बाद राज्य सरकार ने इस काम में कुछ हद तक सफलता हासिल की थी और केदारनाथ के आसपास के क्षेत्रों में सर्च टीमें भेजी गई थीं। लेकिन आज तक, 3075 लापता लोगों का कोई सुराग नहीं मिला है, और सरकार के पास जो अवशेष हैं, उनकी पहचान अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

कंकालों की खोज और परिवारों की उम्मीदें
हालांकि आपदा के बाद के 12 सालों में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों के खोने का दर्द सहा है, लेकिन वे अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कहीं न कहीं उनके लापता रिश्तेदारों के कंकाल मिलेंगे और उन्हें अंतिम संस्कार का मौका मिलेगा। इन परिवारों के दिलों में एक अदृश्य आस है कि एक दिन वे अपने खोए हुए अपनों को सही तरीके से श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
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इस बार क्या बदल सकता है?
सरकार और उच्च न्यायालय द्वारा किए गए प्रयासों से अब उम्मीद है कि लापता लोगों के अवशेषों की खोज में कुछ राहत मिल सकती है। उत्तराखंड सरकार ने इस साल भी सर्च टीमें भेजने की तैयारी कर ली है, इस बीच, आपदा में खोए हुए लोगों के परिवारों की बेचैनी और दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन परिवारों की स्थिति को समझते हुए, सरकार के प्रयास इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

