karni sena sammelan rana sanga controversy : राणा सांगा पर विवादित बयान के खिलाफ प्रदर्शन
karni sena sammelan rana sanga controversy : सपा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा राणा सांगा पर दिए गए विवादित बयान के बाद क्षत्रिय समाज में भारी आक्रोश है। इस विरोध की अगुवाई कर रही करणी सेना ने 12 अप्रैल को राणा सांगा जयंती के अवसर पर ‘रक्त स्वाभिमान सम्मेलन’ का आयोजन किया है। आगरा के गढ़ी रामी (एत्मादपुर) में चल रहे इस सम्मेलन में भारी संख्या में करणी सेना कार्यकर्ता और क्षत्रिय समाज के लोग जुटे हैं।
🛑 पुलिस देख भड़की भीड़, तलवारें लहराईं
दोपहर करीब 2 बजे जब पुलिस बल कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा तो वहां मौजूद युवाओं ने रामजीलाल सुमन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब कुछ लोगों ने पुलिस के सामने ही तलवारें और डंडे लहराए।
इस अप्रत्याशित विरोध को देखते हुए पुलिस बल को मौके से पीछे हटना पड़ा। हालांकि बाद में एडिशनल कमिश्नर और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी वहां पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
🕔 सरकार को दिया 5 बजे तक का अल्टीमेटम
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने एलान किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने कहा:
“हमने सरकार को 5 बजे तक का समय दिया है। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो संघर्ष तेज किया जाएगा। हम अनुशासन में हैं और अनुशासन में ही रहेंगे।”
📣 सम्मेलन से क्या संदेश देना चाहता है समाज?
धीरज सिकरवार (आयोजन समिति सदस्य) ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है, जो गढ़ी रामी से देशभर में एक सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश देगा। आदित्य सिकरवार ने बताया कि इसके लिए गांव-गांव संपर्क किया गया, ताकि क्षत्रिय समाज एकजुट होकर अपनी बात रख सके।
शिवम परमार ने कहा, “यह कार्यक्रम राणा सांगा के सम्मान की लड़ाई है और इसमें कोई अराजकता नहीं होने दी जाएगी।”
⚠️ ‘राणा सांगा का अपमान स्वीकार नहीं’: क्षत्रिय महासभा
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष युवराज अंबरीश पाल सिंह ने कहा:
“हमारे समाज और पूर्वजों का गौरव राणा सांगा का अपमान हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हर योद्धा, जिसने देश के निर्माण में योगदान दिया, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।”
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📌 राणा सांगा विवाद क्या है?
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने बीते दिनों राणा सांगा पर कथित विवादास्पद बयान दिया था, जिसमें उनके ऐतिहासिक योगदान पर सवाल खड़े किए गए थे। इस बयान के बाद से क्षत्रिय समाज में जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है, और करणी सेना ने इसे अपने सम्मान का मुद्दा बना लिया है।
‘रक्त स्वाभिमान सम्मेलन’ केवल एक विरोध नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सम्मान की पुकार है। राणा सांगा जैसे योद्धाओं पर सवाल उठाना ना केवल इतिहास का अपमान है, बल्कि एक पूरे समाज की भावनाओं से खिलवाड़ है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस आंदोलन को कैसे संभालती है और क्या कोई समाधान निकलता है?
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