
karnataka rss control: राजनीति में अक्सर विवाद ही दिशा बदल देते हैं लेकिन इस बार कर्नाटक ने एक ऐसा कदम उठाया है जो भावनाओं और विचारधारा दोनों को हिला रहा है। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि RSS की सार्वजनिक गतिविधियों जैसे पथ संचलन, शाखा आयोजन अब अनुमति के बंधन में होंगी। यानी, जो आज खुली हवा में “हम करेंगे, करेंगे” कह रहा था, वह कल कहीं न कहीं सरकारी इजाज़त के जाल में फंसेगा। लेकिन सिर्फ नियम बनाना बात नहीं है यह सवाल है विचारधारा और सत्ता के बीच की लड़ाई का।
नए नियम क्या कहेंगे और क्यों?
karnataka rss control सार्वजनिक अनुमति अनिवार्य
अब सार्वजनिक सड़कें, सरकारी परिसरों, स्कूल, कॉलेज इन सभी जगहों पर यदि कोई संगठन या व्यक्ति मार्च, रैलियों या शाखा आयोजनों की योजना बनाए, तो सरकार की अनुमति अपेक्षित होगी। बिना अनुमति कार्यक्रम नहीं हो सकेंगे।
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karnataka rss control: नया विधेयक प्रस्तावित
कर्नाटक सरकार अब “Regulation of Use of Government Premises and Properties Bill – 2025” लाने की तैयारी में है। इस विधेयक के ड्राफ्ट में ऐसे कार्यक्रमों पर दंड और संभावित सज़ा तय करने का प्रावधान है। पहली ही गलती पर 2 साल की जेल और ₹50,000 जुर्माने का प्रावधान, और पुनरावृत्ति पर 3 साल की सजा भी संभव है।
karnataka rss control: सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी पर पाबंदी
मंत्री प्रियंक खड़गे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है कि सरकारी कर्मचारी RSS के कार्यक्रमों में हिस्सा न लें। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सिविल सेवा नियम 2021 के नियम 5(1) में यह प्रतिबंध पहले से मौजूद है। उनका कहना है कि विभागों में कुछ अधिकारियों ने RSS की शताब्दी समारोहों में हिस्सा लिया, जिनके खिलाफ showcause नोटिस जारी किए गए हैं।

स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक परिसरों को हदें
सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं और अनुदानित संस्थानों पर RSS शाखा या बैठकें आयोजित करना अब सीमित होगा। मंत्री ने कहा,
आप बिना अनुमति सड़क पर लाठी उठाकर मार्च नहीं निकाल सकते
इन गतिविधियों को नए नियमों के दायरे में लाया जाएगा।
विरोध-प्रतिक्रिया और जटिल दिलचस्पी
भाजपा ने तीखा विरोध किया और कहा कि कांग्रेस हमेशा से RSS को निशाना बना रही है। कांग्रेस नेतृत्व कह रहा है कि यह कदम राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक अवधारणा की रक्षा के लिए है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि कोई भी संगठन सार्वजनिक जगहों पर लोगों को परेशान नहीं कर सकता
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने तमिल नाडु सरकार के RSS प्रतिबंध के अनुभव को देखने का निर्देश दिया है। ऐसे विवादों के बीच यह तय करना मुश्किल है कि यह कदम न्याय का उद्घोष है या राजनीति की चाल।

karnataka rss control: विचार, पहचान और फैसला
जब एक राज्य “कौन कहे क्या कर सकेगा” की सीमा खींचता है, तो वह केवल कानून नहीं बना रहा वह विचारधारा की सीमाएँ तय कर रहा है। RSS पर निर्देश बांधना, सार्वजनिक अनुमति बनाना, सरकारी संस्थानों को मानदंड देना ये सिर्फ नियम नहीं, राजनीतिक संदेश हैं।
लेकिन सवाल यह है क्या ये नियम व्यक्तिगत आज़ादी को दबाएंगे, या सामाजिक संतुलन को मजबूत बनाएंगे? क्या यह कदम विचारों का मुक़ाबला है, या शक्ति प्रदर्शन?
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