karnataka highcourt kannada mandatory notice pil 2023 : 3 हफ्ते में जवाब देने का आदेश!
karnataka highcourt kannada mandatory notice pil 2023: कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य में कन्नड़ भाषा को अनिवार्य करने से जुड़े कानूनों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से तीन हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। यह मामला 2023 में दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसमें राज्य के तीन कानूनों को चुनौती दी गई है। इन कानूनों में कन्नड़ भाषा को CBSE और CISCE स्कूलों में अनिवार्य किया गया है।
कन्नड़ भाषा अनिवार्यता पर सरकार को नोटिस
कार्यवाहक चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस सीएम जोशी की बेंच ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कर्नाटक सरकार और केंद्र को तीन हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया। अदालत ने इस मामले को लेकर सरकार को गंभीर चेतावनी दी और कहा कि यदि सरकार अपनी मशीनरी तैयार नहीं करती है, तो कोर्ट अंतरिम राहत देने पर विचार कर सकता है।
इस मामले में कन्नड़ लैंग्वेज लर्निंग एक्ट-2015, कन्नड़ लैंग्वेज लर्निंग रूल-2017, और कर्नाटक एजुकेशनल इंस्टीट्यूट रूल-2022 को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इन कानूनों को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है और यह कहा कि ये कानून छात्रों को अपनी पसंद की तीन भाषाओं चुनने से रोकते हैं।
कानून पर सवाल: छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन?
याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि राज्य के इन तीन कानूनों के कारण छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विशेष रूप से रिजल्ट और रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने का अधिकार नहीं मिल रहा है। साथ ही, ये कानून कन्नड़ के अलावा अन्य भाषाओं के शिक्षकों की आजीविका को भी खतरे में डाल सकते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि याचिकाकर्ता कन्नड़ को पढ़ाने का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि केवल उसे अनिवार्य करने पर आपत्ति जता रहे हैं।
कर्नाटक में भाषा विवाद: कन्नड़ बोलने को लेकर हंगामा
हाल ही में कर्नाटक में कन्नड़ भाषा को लेकर एक विवाद उभरा था, जब बेंगलुरु में एक बैंक मैनेजर और ग्राहक के बीच कन्नड़ बोलने को लेकर बहस हुई थी। इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें बैंक मैनेजर यह कहते हुए सुनाई दे रही थीं, “यह भारत है, हिंदी मेरी राष्ट्रभाषा है, मैं तो हिंदी में ही बोलूंगी।”
ग्राहक ने उनसे कन्नड़ बोलने का अनुरोध किया, लेकिन मैनेजर ने हिंदी में ही बात की। इस पर ग्राहक ने उत्तर दिया, “पहले कन्नड़, फिर देश”। इस घटना के बाद कन्नड़ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की धमकी दी थी, और बैंक ने बैंक मैनेजर का ट्रांसफर कर दिया था।
कन्नड़ भाषा को लेकर कर्नाटक में बढ़ते विवाद
कर्नाटक में कन्नड़ भाषा को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक विवाद होते रहे हैं। कर्नाटक सरकार द्वारा कन्नड़ को स्कूलों में अनिवार्य करने के फैसले पर कई संगठनों और नागरिकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कन्नड़ को अनिवार्य करने से स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही राष्ट्रीय एकता और अन्य भाषाओं के प्रति सम्मान की भावना को भी सख्त बनाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
कर्नाटक हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद यह देखा जाना होगा कि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती हैं। अगर सरकार समय पर उत्तर नहीं देती, तो अदालत द्वारा अंतरिम राहत देने पर विचार किया जा सकता है। इससे भविष्य में कन्नड़ भाषा की अनिवार्यता को लेकर एक बड़ा निर्णय हो सकता है। इस मामले का परिणाम न केवल कर्नाटक में, बल्कि पूरे भारत में भाषा नीति और संवैधानिक अधिकारों पर एक नया उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कन्नड़ को अनिवार्य करने के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अगर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो अदालत अंतरिम राहत देने पर विचार कर सकती है। यह मामला भाषा की आज़ादी और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा है, जो कि कर्नाटक सहित पूरे भारत में महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा बन चुका है।
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