Karila Mata Dham: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज रंगपंचमी के पावन अवसर पर अशोकनगर जिला स्थित करीला माता धाम में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर क्षेत्रवासियों को अनेक सौगातें प्रदान कीं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए एवं कार्यक्रम के पहले वनोपज, कृषि आधारित उत्पादों और स्व-सहायता समूह की बहनों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ किया गया मेले का शुभारंभ
अशोकनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध मां जानकी धाम करीला में रंग पंचमी के अवसर पर लगने वाला ऐतिहासिक करीला मेला शुरू हो गया है। आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ रही है। प्रशासन के मुताबिक अगले 24 घंटों में लाखों श्रद्धालु माता जानकी के दर्शन के लिए करीला धाम पहुंचेंगे। बता दें की मेले का शुभारंभ पारंपरिक रूप से झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ किया गया।
Karila Mata Dham: क्षेत्र में कई विकास कार्यों की सौगात दी
रंग पंचमी के इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी करीला धाम पहुंचें। वे माता जानकी के दर्शन कर मेला परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए और सभा को संबोधित किया। साथ ही क्षेत्र में कई विकास कार्यों की सौगात दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की बड़ी घोषणा
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने ग्राम दीपनाखेड़ा से करीला धाम तक 10 किलोमीटर की सड़क की स्वीकृत किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिए कि करीला धाम तीर्थ के लिए कार्य योजना बनाई जाए। बता दें, इससे पहले उन्होंने करीला धाम पहुंचकर माता जानकी के दर्शन किए। यहां उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की।
पूजा-पाठ के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ खेली फूलों की होली भी खेली। इस दौरान उन्होंने कहा कि करीला धाम में आस्था के साथ पूर्ण श्रद्धा भाव से श्रद्धालु माता जानकी के दर्शन करने आते हैं। माता जानकी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करती हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर माता जानकी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया है।
माता सीता शक्ति पराक्रम की देवी है, माता सीता का प्रताप गौरवशाली संस्कृति है। इस पवित्र स्थान से महर्षि वाल्मीकि, सीता माता एवं लव कुश की कहानी जुड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक काल में अलग-अलग देवताओं का महत्व रहा है। हमारी भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को प्रथम स्थान दिया गया है।
इतनी लागत के होंगे निर्माण कार्य
अशोकनगर में सांदीपनी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महिदपुर (लागत 29.45 करोड़), मोहन पुर लिधोरा मार्ग से किर्राया सड़क (लागत 1.26 करोड़), मुंगावली चंदेरी मार्ग से डुंगासरा तक सड़क निमार्ण (लागत 25 लाख रुपये), नदी पर उच्च स्तरीय पुल निमार्ण (लागत 7.06 करोड़ रुपये), 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन राजपुर (लागत 10.94 करोड़ रुपये), आंगनवाड़ी भवन निर्माण ग्राम खैरोना (लागत 95 लाख रुपये), पंचायत भवन निमार्ण कजराई (लागत 2 लाख 25 हजार रुपये), शासकीय गणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय (लागत 5.42 करोड़ रुपये), 100 बिस्तरीय बालिका छात्रावास मल्हारगढ़ (लागत 1.78 करोड़ रुपये), प्राथमिक शाला भवन अथाई घाट (लागत 43लाख रुपये) का लोकार्पण हुआ। इसके अलावा मां जानकी करीला धाम परिसर में वीआईपी दर्शन एप्रोच मार्ग (लागत 6.50 लाख रुपये), सीता रसोई के पास हट निर्माण (लागत 5 लाख रुपये), टीनशेड निर्माण (लागत 2.5 लाख रुपये), हेलीपेड-रोड निर्माण (लागत 15 लाख रुपये), वीआईपी पार्किंग के लिए रैंप निर्माण (लागत 5 लाख रुपये), पानी टंकी निर्माण (लागत 40 लाख रुपये), पेयजल के लिए नए 5 हैंडपंप (लागत 89 लाख रुपये) का लोकार्पण भी हुआ।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के चलते विशेष व्यवस्था
इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी महिला अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में महिलाओं की भूमिका और क्षमता को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जा सके।
पौराणिक मान्यता से जुड़ा है करीला धाम
बता दें की करीला धाम को लेकर धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि जब भगवान राम ने माता सीता को वनवास भेजा था, तब वे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में आकर ठहरी थीं। और इससे माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां माता सीता ने अपने पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया था।
साथ ही ये भी माना जाता है की लव-कुश के जन्म के समय स्वर्ग से अप्सराएं यहां उतरी थीं और उन्होंने खुशी में नृत्य किया था। इसी मान्यता के चलते यहां रंग पंचमी की रात को नृत्यांगनाओं द्वारा बधाई नृत्य करने की परंपरा चली आ रही है। आज भी सैकड़ों नृत्यांगनाएं पूरी रात राई नृत्य करती हैं। जहा हजारों की संख्या में लोग शामिल होते है। और एक दूसरे को गुलाल लगाते है।
Karila Mata Dham: 200 साल पुराना है करीला धाम
कहा जाता है की यह करीला धाम लगभग 200 साल पुराना है। और महंत तपसी महाराज को स्वप्न में संकेत मिला था कि करीला गांव की पहाड़ी पर स्थित वाल्मीकि आश्रम में माता जानकी और लव-कुश कुछ समय तक रहे थे।
स्वप्न के बाद तपसी महाराज ने इस स्थान की खोज की और उन्हें वही आश्रम मिला जैसा उन्होंने स्वप्न में देखा था। इसके बाद उन्होंने वहां रहकर पूजा-अर्चना शुरू की और आसपास के ग्रामीणों के सहयोग से यह स्थान धीरे-धीरे एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया।
