Karauli News: राजस्थान के करौली जिले के कैमोखरी गांव (करणपुर क्षेत्र) में एक प्रेरणादायक और अनूठा विवाह समारोह संपन्न हुआ, जिसने पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी परंपरा का अद्भुत संदेश दिया। दूल्हा सत्येंद्र मीणा और दुल्हन विनीता मीणा की शादी धराडी प्रथा के अनुसार कराई गई, जो जिले में इस परंपरा के तहत होने वाली पहली शादी मानी जा रही है।

Karauli News: जमीन की रक्षा का संकल्प लिया
धराडी प्रथा आदिवासी समुदाय की एक विशिष्ट परंपरा है, जिसमें किसी विशेष वृक्ष या स्थान को मातृशक्ति और प्रकृति का प्रतीक मानकर विवाह संपन्न कराया जाता है। इस विवाह में अग्नि की जगह बरगद और नीम के पौधों को साक्षी मानकर सात फेरे लिए गए और दंपति ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया। यह विवाह न केवल एक सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सार्थक पहल है।
पारंपरिक मूल्यों को प्राथमिकता दी गई
Karauli News: यह आयोजन जोहार जागृति मंच, आदिवासी मिशन और मीणा महापंचायत के संयुक्त निर्णय से तय किए गए 14 नियमों के अनुसार संपन्न हुआ। समारोह में किसी भी प्रकार के पाखंड या दिखावे से दूर रहते हुए प्रकृति और पारंपरिक मूल्यों को प्राथमिकता दी गई। विवाह स्थल पर सजावटी मंडप के स्थान पर नीम और बरगद के पौधे लगाए गए, जिन्हें पूजा गया।
Karauli News: उपहार स्वरूप पौधे भेंट किए गए
इस विशेष विवाह समारोह की एक और विशेष बात यह रही कि विदाई के समय बारातियों को उपहार स्वरूप पौधे भेंट किए गए, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण का संदेश अपने साथ लेकर जाएं। दुल्हन विनीता मीणा द्वारा पारंपरिक धराडी भाषा में छपवाया गया विवाह निमंत्रण पत्र भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना।
