Kanpur Kidney Scandal: कानपुर किडनी कांड को लेकर लगातार बड़े-बड़े खुलासे होते जा रहे है। 50,000 रुपये के विवाद ने करोड़ों रुपये के मानव अंगों के अवैध व्यापार का पर्दाफाश कर दिया। किडनी रैकेट में गिरफ्तार 8 लोगों में 5 डॉक्टर शामिल हैं। इस रैकेट में कम से कम 40 लोगों, जिनमें विदेशी लोग भी शामिल हैं, जिनकी अवैध सर्जरी की गई थी। आरोप है कि किडनी 10 लाख रुपये में खरीदी जाती थी और 60 लाख में बेची जाती थी, लेकिन उनका पर्दाफाश एक छात्र के साथ हुए विवाद से हुआ, जिसने अपनी किडनी बेची थी।

10 लाख में सौदा
बिहार के समस्तीपुर के MBA छात्र आयुष ने पुलिस को किडनी रैकेट के बारे में सूचना दी थी। मेरठ में पढ़ने वाले आयुष ने आर्थिक तंगी के चलते अपनी एक किडनी 10 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई। उनका दावा है कि उन्हें तय रकम से 50,000 रुपये कम मिले। कम पैसे मिलने से क्रोधित होकर उसने पुलिस को फोन किया। जैसे ही जांच शुरू हुई तो सुराग मिलने लगे, पुलिस को शिवम अग्रवाल के बारे में पता चला, जो एम्बुलेंस चालक था और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लुभाने के लिए टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था।

OT टेक्नीशियन ने निकाली किडनी
कानपुर किडनी कांड में पुलिस दिल्ली के डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट) मुदस्सर अली सिद्दीकी की तलाश कर रही है। उसी ने डोनर आयुष की किडनी निकाली थी, और महिला को ट्रांसप्लांट की थी। असल में वह डॉक्टर नहीं बल्कि OT टेक्नीशियन है। 2 अप्रैल को पकड़े गए OT टेक्नीशियन से पूछताछ के बाद एक टीम दिल्ली के उत्तम नगर गई। आरोपी मुदस्सर अली सिद्दीकी फरार था। उसकी पत्नी और परिवार से पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि मुदस्सर यूरोलॉजिस्ट नहीं बल्कि OT टेक्नीशियन है। कानपुर के चर्चित किडनी कांड में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी हैं।
2 आरोपियों को जेल भेजा
किडनी स्कैंडल की जांच को DCP वेस्ट IPS एसएम कासिम आबिदी लीड कर रहे हैं। DCP ने बताया- ऑपरेशन में शामिल 2 ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को जेल भेजा गया। दोनों ने पूछताछ में बताया कि उनके साथ फ्लाइट से डॉ. मुदस्सर दिल्ली से कानपुर आया था। अली ने ही आयुष की किडनी निकाली और फिर पारुल तोमर की किडनी ट्रांसप्लांट की। इसके बाद दोनों को अलग-अलग हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया।

Kanpur Kidney Scandal: पार्टनर गायब
जांच में पता चला कि मेडिलाइफ हॉस्पिटल तिर्वा, कन्नौज के रहने वाले डॉ. रोहन, सौरिख कन्नौज के डॉ. संदीप और औरैया निवासी डॉ. नरेंद्र की पार्टनरशिप में है। किडनी कांड का खुलासा होने के बाद से हॉस्पिटल बंद पड़े है। तीनों डॉक्टर ने कानपुर स्थित अपने फ्लैट और पैतृक आवास से लापता हैं।
