Kamakhya Temple Gupt Navratri Rituals: असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह न केवल देवी उपासना का एक प्रमुख स्थान है, बल्कि तांत्रिक साधनाओं और गूढ़ रहस्यों का भी अद्भुत केंद्र है। मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां माता सती का योनि भाग गिरा था, इसलिए यह मंदिर स्त्री शक्ति का प्रतीक बन गया। ‘काम’ का अर्थ है इच्छा, इसलिए देवी को इच्छा की देवी भी माना जाता है।
अंबुबाची मेला और रजस्वला पूजा….
गुप्त नवरात्रि के दौरान यहां अंबुबाची मेला लगता है, जो देवी के रजोधर्म (मासिक धर्म) की पूजा से जुड़ा है। इन 3 दिनों में मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद रहते हैं। मान्यता है कि देवी इस दौरान रजस्वला होती हैं और यह समय उन्हें विश्राम देने का होता है। इन दिनों ब्रह्मपुत्र नदी का जल लाल हो जाता है, जिसे देवी की शक्ति का चमत्कार माना जाता है। अंबुबाची मेला स्त्री की जैविक शक्ति और प्रकृति के चक्र का उत्सव है।

तांत्रिकों और अघोरियों की उपस्थिति…
अंबुबाची के समय देशभर से तांत्रिक, अघोरी, और साधक यहां जुटते हैं। ये साधक इस दौरान गुप्त साधनाएं करते हैं जो आम श्रद्धालुओं की पहुंच से बाहर होती हैं। गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाता, जिससे इसकी रहस्यमयी ऊर्जा और भी गहन मानी जाती है। यह एक ऐसा पर्व है, जहां श्रद्धा और तंत्र विद्या का दुर्लभ संगम देखने को मिलता है।
अंगोदक और अंगवस्त्र: पवित्र प्रसाद…
मंदिर के कपाट खुलने के बाद अंगोदक (पवित्र जल) और अंगवस्त्र (लाल कपड़ा) को प्रसाद स्वरूप बांटा जाता है। यह लाल कपड़ा देवी की रजस्वला अवस्था में गर्भगृह में रखा जाता है और माना जाता है कि यह विशेष ऊर्जा से युक्त होता है। यह प्रसाद हर किसी को नहीं दिया जाता, बल्कि सिर्फ संतान की कामना करने वाली महिलाओं, कुमारी कन्याओं और विशेष भक्तों को ही मिलता है।

64 योगिनियों की साधना…
कामाख्या मंदिर योगिनी तंत्र का केंद्र है। यहां 64 योगिनियों की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान इन योगिनियों को प्रसन्न करने के लिए गूढ़ तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते हैं। यह भारत का एकमात्र मंदिर है, जहां देवी के मासिक धर्म की पूजा विधिवत रूप से होती है। यह साधना देवी की सृजनात्मक शक्ति को जगाने का प्रतीक है।
प्रसाद और पूजा के कड़े नियम…
अंबुबाची मेला कोई सामान्य धार्मिक आयोजन नहीं है। यह एक गहन तांत्रिक पर्व है, जिसमें प्रसाद वितरण के भी सख्त नियम होते हैं। देवी का अंगवस्त्र प्रसाद आम भक्तों को नहीं दिया जाता, बल्कि यह गुप्त रूप से तांत्रिकों या विशेष पात्रों को ही प्रदान किया जाता है। यह प्रसाद रक्षा, संतान प्राप्ति, और शत्रु नाश में उपयोगी माना जाता है।
गर्भगृह में रोक और रहस्य…
मेले के दौरान पर्यटकों और शोधकर्ताओं को मंदिर के गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं होती। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यह समय तांत्रिक क्रियाओं और साधनाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है। यही कारण है कि अंबुबाची पर्व में रहस्य और शक्ति का सम्मिलन एक नई ऊंचाई पर पहुंचता है।

देवी कामाख्या की लीला: ऊर्जा, रहस्य और भक्ति का समावेश….
देवी कामाख्या की लीला केवल पूजा का नहीं, बल्कि स्त्री सृजन शक्ति का प्रतीक है। गुप्त नवरात्रि और अंबुबाची मेला इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि सनातन संस्कृति में प्राकृतिक और जैविक चक्र को भी पूजा जाता है। यह पर्व नारी शक्ति, प्रकृति, तंत्र और भक्ति का एक अलौकिक संगम है।
