कैलारस शक्कर कारखाना बंद करने का विरोध
मध्यप्रदेश के मुरैना(morena mp) जिले में कैलारस शक्कर कारखाना बंद करने के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। इस विवाद के बीच जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार को तीखी चेतावनी दी है। उन्होंने मंच से कहा, “सरकार अगर कैलारस कारखाने पर कब्जा लेने आए, तो हमारी मां का दूध देखा देंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “हमारे घरों में आज भी हथियार रखे हैं।”
किसान-मजदूर महापंचायत के मंच से भरी हुंकार
विधायक पंकज उपाध्याय ने का ये बयान संयुक्त किसान मोर्चा और कांग्रेस द्वारा आयोजित किसान-मजदूर महापंचायत के मंच से आया, जिसमें किसान नेता राकेश टिकैत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे। पंकज उपाध्याय ने मंच से सरकार को चेतावनी दी है कि कैलारस शक्कर कारखाने का कब्जा लेकर दिखा दे, हमारी मां ने दूध पिलाया है तो हम रोकेंगे और सरकार को उसकी मां का दूध याद दिला देंगे।
“हमारे हथियार अभी भी घर पर ऱखे है”
विधायक यहां पर भी नहीं रुके उन्होंने आगे कहा. कि चंबल का इतिहास बागी वाला है, हमारे हथियार अभी भी घर पर रखे हैं। पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि शक्कर कारखाना की 300 बीघा जमीन एमएसएमई को सौंप दी गई है।
शक्कर कारखाने को बंद करने का विरोध
दरअसल कैलारस शक्कर कारखाने को बंद करने के सरकार के फैसले के खिलाफ रविवार को मुरैना के जीवाजी गंज में संयुक्त किसान मोर्चा और कांग्रेस ने मिलकर किसान मजदूर महापंचायत का आयोजन किया। इसमें किसान नेता राकेश टिकैत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत कई नेता शामिल हुए।जीतू पटवारी बोले- आदिवासियों की जमीन वापस दिलाएंगे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- हमारे नेता पंकज उपाध्याय ने कहा कब्जा लेने आओ खून की नदियां बह जाएंगी। उस खून में हमारा भी खून शामिल करेंगे। हम आपके साथ हैं। जब 2028 में मैंने कहा किसानों की सरकार मप्र में बनेगी। तब मैं वचन देता हूं कांग्रेस पार्टी किसानों का साथ देगी।
गरीब आदिवासियों को उनकी जमीन वापस दिलाएंगे-पटवारी
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि 1 लाख 40 हजार आदिवासियों की जमीन भाजपा, अडानी, अंबानी जी और अलग-अलग उद्योगपतियों ने ले ली। हम इसकी पूरी समीक्षा करेंगे। हमारी सरकार जैसे ही बनेगी। आदिवासियों की जमीन जिन उद्योगपतियों, बीजेपी मंत्रियों-विधायकों चाहे किसी ने भी, कांग्रेस के नेताओं ने भी ली होगी तो हम उसकी समीक्षा करके वापस किसानों, आदिवासियों को दिलाएंगे।
केलारश शक्कर मील का इतिहास
स्थापना: 25 अक्टूबर 1965
उत्पादन शुरू: 1971-72
जुड़ाव: 20,000 से अधिक किसान
रोजगार: 1,500 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
सहकारिता समितियां: 250 से अधिक
अस्थाई रूप से: 2008-09
2011 में पूरी तरह स्थाई बंद
