Kachnar Shiv Mandir Jabalpur: जबलपुर में तो वैसे बहुत से मंदिर है, लेकिन एक ऐसा प्रसिद्ध मंदिर जहां खुले आसमान के नीचे भगवान शंकर की प्रतिमा विराजमान है, कहा जाता है यह प्रतिमा मध्यप्रदेश की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा हैं, जो कि जबलपुर के विजय नगर क्षेत्र में स्थित कचनार सिटी में स्थित है। यहां भगवान शंकर की प्रतिमा 76 फिट (23m) ऊंची है। और भगवान शंकर के सामने नंदी की मूर्ति भी प्रतिष्ठित है।
यह मंदिर सिर्फ जबलपुर में ही नहीं बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। लोग यहां दूर – दूर से भगवान के दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर शंकर चौड़ा के नाम से भी प्रसिद्ध है, क्योकि कई सालो पहले यहां इस गाने की शूटिंग की गई थी तभी से इसे लोग शंकर चौड़ा भी कहते हैं।
क्या है खास?
यहां भगवान शंकर खुले आसमान के नीचे विराजमान है। प्रतिमा के नीचे बनी गुफा में देश के विभिन्न ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति स्थापित की गई है यहां 12 ज्योतिर्लिंग की प्रतिमाएं विराजमान हैं। एक दरवाजे से प्रवेश किया जाता है और दर्शन कर दूसरा रास्ता निकासी के लिए खुला होता है

कहा जाता है कि यहां गुफा के अंदर एक और गुफा बनी है जो मंदिर का गर्भ गृह है। मंदिर के गर्भ गृह में पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की मूर्ति भी रखी गई है। इसके अलावा यहां कृष्ण और सप्त ऋषियों की भी मूर्ति है, जो शिव भगवान का भजन करने की मुद्रा में हैं। लेकिन वहां किसी को जाने की अनुमति नहीं है।
निर्माण का इतिहास और शिल्पी की अनूठी कहानी…
इस मंदिर को अरुण तिवारी, एक बिल्डर द्वारा बनाया गया था, जिनकी प्रेरणा बैंगलुरू में एक 41‑फीट की शिव मूर्ति देखकर मिली थी। साल 2000 में कचनार सिटी का प्लान तैयार हुआ और 2001 में मूर्ति निर्माण शुरू हुआ। मूर्तिकार K. श्रीधर और उनकी टीम ने लगभग तीन वर्षों में इस सुंदर प्रतिमा को तैयार किया और 2006 में 15 फरवरी को इसका प्राण‑प्रतिष्ठा कर इसे जनता के दर्शन‑पूजन हेतु खोला गया।

शांत वातावरण और आधुनिक सुविधाएं…
मंदिर परिसर लगभग तीन एकड़ में फैला हुआ है, हरियाली, मुलायम घास और स्वच्छता बनी रहती है, यहां एक खूबसूरत पार्क भी है जहां पर्यटक योग और प्राणायाम भी कर सकते हैं। शाम को रंग-बिरंगी लाइटिंग और रोज शाम की महादेव आरती का माहौल भक्तिमय बना देती है। मंदिर प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है, और इसमें प्रवेश मुफ्त है।
धार्मिक आयोजन और प्रमुख त्यौहार…
महाशिवरात्रि, सावन माह और बसंत पंचमी पर मंदिर में विशेष पूजा‑भजन, हवन और आरती का आयोजन होता है। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं और वातावरण अत्यंत श्रद्धापूर्ण हो जाता है। इन अवसरों में यहां मेलो का आयोजन किया जाता है।

