Jyeshtha Month 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के अगले दिन से ज्येष्ठ माह की शुरुआत हो जाती है। यह माह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य, तप और पुण्य अर्जन के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है। इस साल 13 मई से ज्येष्ठ मास का आरंभ हुआ है, जो 10 जून तक चलेगा। इस अवधि में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों का विशेष धार्मिक महत्व होता है और कहा जाता है कि इन व्रतों का पालन करने से भाग्य के द्वार खुल सकते हैं।
Jyeshtha Month 2025: ज्येष्ठ माह का महत्व..
इसे तप का महीना कहा जाता है। इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है, ऐसे में शारीरिक संयम, जलदान, और ब्रह्मचर्य पालन जैसे कृत्य विशेष पुण्यकारी माने जाते हैं। यह माह विशेष रूप से भगवान विष्णु, भगवान शिव, और सूर्य देव की उपासना के लिए उत्तम होता है। स्कंद पुराण में इस माह में जल पिलाना, व्रत करना और दान देने को अत्यंत फलदायक बताया गया है।
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार…
नीचे ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले कुछ प्रमुख पर्व और व्रतों की सूची दी गई है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि आपकी किस्मत को बदलने की शक्ति रखते हैं।

1. ज्येष्ठ अमावस्या (7 जून 2025, शुक्रवार)
ज्येष्ठ अमावस्या को पितरों के लिए तर्पण और दान का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर के पूर्वजों के निमित्त दान करने से पितृ दोष समाप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया जलदान और अन्नदान अत्यंत फलदायी होता है।
2. वट सावित्री व्रत (6 जून 2025, गुरुवार)
विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री और सत्यवान की कथा का पाठ किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।
3. गंगा दशहरा (16 मई 2025, शुक्रवार)
गंगा दशहरा को गंगा मैया का पृथ्वी पर अवतरण दिवस माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने, दान देने और गंगा जल से पवित्र होने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन स्नान मात्र से दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं।
4. निर्जला एकादशी (18 मई 2025, रविवार)
इस एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी व्रत माना गया है। इसमें बिना जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है। यह व्रत सभी एकादशियों का फल देने वाला होता है। जो श्रद्धालु केवल एक ही एकादशी का व्रत रख सकते हैं, उनके लिए यह सर्वोत्तम मानी गई है।
5. प्रदोष व्रत (24 मई और 7 जून 2025)
प्रदोष व्रत हर त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव के लिए रखा जाता है। ज्येष्ठ माह में यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है। इस दिन शाम को शिव-पार्वती की पूजा कर उपवास करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
6. मासिक शिवरात्रि (25 मई 2025, रविवार)
मासिक शिवरात्रि भी भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक उत्तम अवसर है। इस दिन उपवास और रात्रि जागरण करने से व्यक्ति के सभी दोष दूर होते हैं।
ज्येष्ठ माह के अन्य पुण्य कार्य
जलदान का विशेष महत्व: तपते हुए सूर्य के मौसम में प्यासे लोगों को जल पिलाना, प्याऊ लगवाना या मटकों में पानी भर कर राहगीरों के लिए रखना अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है।
1. आंवला, खरबूजा, आम और जौ का दान: इन वस्तुओं का दान इस माह में विशेष फलदायी होता है।
2. गायों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था: धार्मिक ग्रंथों में जीवों की सेवा को भी मोक्षदायक कहा गया है।
स्वास्थ्य और ज्येष्ठ मास..
गर्मी के कारण यह माह स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन धार्मिक अनुशासन जैसे व्रत, हल्का भोजन, अधिक जल सेवन, ब्रह्मचर्य और योग आदि को अपनाकर न केवल आत्मिक शुद्धि बल्कि शारीरिक शुद्धि भी संभव है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समय शरीर की अग्नि को नियंत्रित करने का होता है।
ज्येष्ठ माह में क्या करें और क्या न करें
क्या करें..
1. प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दें
2. जल और फल का दान करें
3. नियमित रूप से शीतल जल सेवन करें
4. व्रत एवं पूजा में मन लगाएं
5. गाय, कुत्ते, पक्षियों को खाना खिलाएं
क्या न करें..
1. क्रोध, असत्य और लोभ से बचें
2. दिन में अधिक नींद न लें
3. तैलीय और गरिष्ठ भोजन न करें
4. जीवों को हानि न पहुँचाएं
