दो दिन मनाएं, पाएं अक्षय पुण्य! जानें कैसे करें नदी स्नान, सूर्य-चंद्र पूजन और दान-पुण्य 🌕
10 और 11 जून 2025 को मनाई जाएगी ज्येष्ठ पूर्णिमा, जो इस वर्ष विशेष महत्व रखती है। इस दिन को लेकर धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं प्राचीन काल से चली आ रही हैं। आइए जानते हैं इस दिन के महत्व, पूजा विधि और दान-पुण्य के बारे में।
📅 ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन नदी स्नान, सूर्य और चंद्र पूजन, और दान-पुण्य से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। साथ ही, इस दिन संत कबीरदास की जयंती भी मनाई जाती है, जो समाज सुधारक और संत थे।
🛕 पूजा विधि और धार्मिक कार्य
1. नदी स्नान और जल दान
- नदी स्नान: इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और तीर्थ स्मरण करें।
- जल दान: किसी मंदिर, सार्वजनिक स्थान या प्याऊ में जल का दान करें। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
2. सूर्य और चंद्र पूजन
- सूर्य अर्घ्य: प्रात: सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य दें और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
- चंद्र पूजन: सायं चंद्रमा के उदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दें और “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें।
3. भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का पूजन
- अभिषेक: दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करें, फिर जल से शुद्ध करें।
- भोग: पीले वस्त्र, फूल और मिठाई का भोग लगाएं।
- आरती और मंत्र जाप: आरती करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
4. बाल गोपाल की पूजा
- अभिषेक: भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का अभिषेक करें।
- भोग: माखन-मिश्री का भोग लगाएं, नए वस्त्र पहनाएं।
- मंत्र जाप: “कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें।
5. हनुमान चालीसा का पाठ
- पूजन: हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- सुंदरकांड: समय हो तो सुंदरकांड का पाठ भी करें।
6. गौ सेवा और दान
- गौ सेवा: गायों को हरी घास खिलाएं और गौशाला में चारा दान करें।
- दान: जरूरतमंदों को कपड़े, अनाज, जूते-चप्पल आदि का दान करें।
📖 धार्मिक महत्व और लाभ
- अक्षय पुण्य: इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य जीवनभर असर करता है, जिसे अक्षय पुण्य कहा जाता है।
- संत कबीरदास की जयंती: इस दिन संत कबीरदास की जयंती भी मनाई जाती है। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज में प्रासंगिक हैं।
- सत्यनारायण कथा: इस दिन सत्यनारायण कथा पढ़ना और सुनना विशेष फलदायी होता है।
