joint meeting of committees: भोपाल में मध्यप्रदेश विधानसभा की वर्ष 2026-27 के लिए नवगठित सभा समितियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने हिस्सा लिया। सभी वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश के विकास और लोकतंत्र की मजबूती में इन समितियों को ‘मिनी विधानसभा’ बताते हुए उनके अधिकारों और कर्तव्यों पर जोर दिया।

joint meeting of committees: प्रमुख बिंदु और वक्ताओं के विचार
संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय सभा समितियां विधानसभा की तरह ही बेहद पावरफुल होती हैं।अगर समितियों की सिफारिशें तथ्यों और नियमों पर आधारित हैं, तो सरकार और अधिकारियों को उन्हें मानना ही पड़ता है। कोई भी अधिकारी जनप्रतिनिधि पर हावी नहीं हो सकता।
joint meeting of committees: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
समितियां अधिकार संपन्न हैं और इनके सुझावों से सरकार की कार्यकुशलता बढ़ती है।पीएम मोदी के नेतृत्व में देश का लोकतंत्र मजबूत हो रहा, तेजी से बदलती वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें लोकतांत्रिक ढांचे को और सुदृढ़ करना होगा।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर
विधानसभा ‘मां’ के समान है ,विधानसभा प्रदेश की 8 करोड़ जनता के लिए मां की तरह है। यह लोकसभा और पंचायतों के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है।
समितियां लघु विधानसभा जो विषय सदन की समय-सीमा और नियमों के कारण छूट जाते हैं, उनका समाधान इन सर्वदलीय समितियों में आसानी से हो सकता है। समिति का अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका में होता है।बैठकों का लक्ष्य हर समिति को साल में कम से कम 12 बैठकें करनी चाहिए। जरूरी नहीं कि बैठक के लिए कोई विशेष एजेंडा हो, सामान्य चर्चाओं से भी बड़े विषय सामने आते हैं।
विपक्ष की भूमिका लोकतंत्र की खूबसूरती यह है कि सरकार के कामकाज की मॉनिटरिंग करने वाली सबसे अहम ‘लोक लेखा समिति’ की जिम्मेदारी विपक्ष के वरिष्ठ नेता के पास होती है।
