JMM Assam Politics: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) अब झारखंड की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. जहां वह आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को सीधी चुनौती देने की तैयारी में जुट गई है.

35 से 40 विधानसभा सीटों पर नजर
बता दें की झामुमो असम की करीब 35 से 40 विधानसभा सीटों का आकलन कर रहा है. ये वे सीटें हैं, जहां आदिवासी आबादी और टी-ट्राइब (चाय जनजाति) मतदाताओं की संख्या काफी प्रभावशाली मानी जाती है. असम में आदिवासी आबादी करीब 70 लाख है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20% है. 2011 की जनगणना के अनुसार, इनमें से केवल 38.8 लाख लोगों को ही अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है.
JMM Assam Politics: आदिवासी असंतोष को भुनाने की कोशिश
झामुमो का मानना है कि असम में आदिवासी समुदाय लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा और सामाजिक-आर्थिक भेदभाव का शिकार रहा है. पार्टी का दावा है कि भाजपा सरकार ने आदिवासियों को उनकी पारंपरिक पहचान, सामाजिक अधिकार और आर्थिक मजबूती से दूर रखा है. इसी असंतोष को झामुमो अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति बना रही है.
अपने संबोधन में हेमंत सोरेन ने आदिवासियों से एकजुट होकर मतदान करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समुदाय संगठित हो जाए, तो वह असम की राजनीति की दिशा और दशा बदल सकता है.
संगठन मजबूत करने को भेजी गई टीम
असम दौरे से पहले झामुमो ने एक चार सदस्यीय टीम वहां भेजी थी, जिसमें राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा, विधायक एमटी राजा और भूषण टुडू शामिल थे. इन्हीं बैठकों के बाद तिनसुकिया में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सभा आयोजित की गई, जिससे झामुमो की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं.
JMM Assam Politics: चुनाव लड़ने पर अंतिम फैसला बाकी
झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया है कि प्रतिनिधिमंडल का दौरा फिलहाल असम के आदिवासियों, खासकर टी-ट्राइब समुदाय की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए था.
भाजपा झामुमो को बता रही कमजोर
सत्तारूढ़ भाजपा झामुमो की असम में मौजूदगी को हल्के में आंक रही है. भाजपा नेताओं का कहना है कि झामुमो की असम में न तो कोई मजबूत संगठनात्मक पकड़ है और न ही व्यापक जनाधार है.
