Jharkhand news: झारखंड की राजनीति में शनिवार को पुनः हलचल तेज हो गई है। जमशेदपुर पश्चिम से विधायक सरयू राय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसने सत्ता के समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राय ने बिना भाजपा और कांग्रेस के समर्थन के सरकार बनाने का फार्मूला सामने रखकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा को और गरमा दिया है।
गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस सरकार का प्रस्ताव
राय ने दावा किया कि झारखंड में ऐसी स्थिति बन सकती है, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को न तो कांग्रेस की जरूरत होगी और न ही भाजपा के सहारे की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री सोरेन से अपील करते हुए कहा कि यदि वे राजनीतिक साहस दिखाते हैं, तो वे खुद बिना किसी शर्त के बाहर से समर्थन देने को तैयार हैं।

राय ने पेश किया बहुमत का गणित
राय ने अपने प्रस्ताव को मजबूत करने के लिए विधानसभा का गणित भी सीएम सोरेन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों की जरूरत होती है।
उनके अनुसार, JMM के पास 34 विधायक हैं। इसके साथ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 विधायक, भाकपा माले के 2 विधायक और एक निर्दलीय वोट मिलाकर संख्या 41 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में सरकार गठन के लिए कांग्रेस या भाजपा के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी।
कांग्रेस-JMM रिश्तों पर उठाए सवाल
आगे, राय ने कांग्रेस और JMM के बीच बढ़ती खटास को भी उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार चुनाव में कांग्रेस ने JMM को उचित भागीदारी नहीं दी और अब असम चुनाव में भी यही रुख देखने को मिल रहा है। उनके मुताबिक, कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों के आधार पर ही गठबंधन करती है, जिससे सहयोगी दलों में असंतोष पैदा होता है।
असम चुनाव के बाद बदल सकते हैं समीकरण
राय ने संकेत दिए कि असम विधानसभा चुनाव के परिणाम झारखंड की राजनीति पर असर डाल सकते हैं। उनका मानना है कि चुनाव परिणामों के बाद नए राजनीतिक विकल्प उभर सकते हैं और गठबंधन की दिशा बदल सकती है। फिलहाल, यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे भविष्य के सियासी घटनाक्रमों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं |
