Jharkhand news: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बुधवार को गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ‘ममता वाहन’ चालकों ने 18 महीनों से भुगतान न मिलने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
18 माह से नहीं मिला भुगतान, फूटा वाहन चालकों का गुस्सा

बरहेट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े ‘ममता वाहन’ चालकों ने बताया कि उन्हें अक्टूबर 2024 से अब तक भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और वाहन संचालन करना मुश्किल हो गया है। ममता वाहन चालक संघ के अध्यक्ष हरेंद्र पंडित ने विस्तार से बताया कि कई बार संबंधित विभाग को अवगत कराने और आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होनें आगे कहा कि मजबूर होकर चालकों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
22 पंचायतों में ठप हुई स्वास्थ्य सेवा
चालकों की हड़ताल का सीधा असर बरहेट प्रखंड की 22 पंचायतों पर पड़ा है। ‘ममता वाहन’ सेवा ठप होने से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने के लिए खुद व्यवस्था करनी पड़ रही है। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में और भी चिंताजनक है, जहां परिवहन के सीमित साधनों के कारण ठीक समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना कठिन हो गया है।
जिले के स्वास्थ्य विभाग ने दिया आश्वासन
इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने कहा कि उन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं थी, लेकिन अब इस पर जल्द ही संज्ञान लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मरीजों को असुविधा न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। वहीं, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज कर्मकार ने भी इस बात की पुष्टि की कि ममता वाहन चालक हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अपने स्तर पर गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर आता है, तो उसे सरकारी दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
जल्द समाधान की जताई जा रही उम्मीद
स्वास्थ्य अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, ताकि ‘ममता वाहन’ सेवा फिर से शुरू हो सके और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें। इस हड़ताल ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दों को उजागर कर दिया है।
