Jharkhand news: केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है. दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अदालत से राहत मिलने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर शनिवार को तीखा प्रहार किया है. पार्टी ने झारखण्डके मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में पेश किए गए साक्ष्यों को “राजनीतिक प्रोपेगैंडा” करार दिया है.

‘टीवी-फ्रिज के बिल’ बने सियासी मुद्दा
JMM ने अपने ‘X’ हैंडल से शनिवार को दावा किया कि ED ने हेमंत सोरेन के खिलाफ तथाकथित सबूत के तौर पर एक टीवी और एक फ्रिज के बिल पेश किए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹29,000 है. पार्टी ने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों को “ब्रह्मास्त्र” की तरह पेश कर महीनों तक मीडिया ट्रायल चलाया गया और एक निर्वाचित मुख्यमंत्री को जेल भेजने की कोशिश की गई.
पार्टी के द्वारा शेयर की गयी फोटोज में दो इनवॉयस दिखाए गए हैं. पहला बिल 19 फरवरी, 2017 का है, जो रांची की मित्तल एजेंसी से जारी हुआ और ₹15,200 (VAT सहित) का है. वहीं, दूसरा बिल एमएस परफेक्ट विजन से जारी शाओमी स्मार्ट टीवी का है, जिसकी कुल कीमत ₹14,000 (GST सहित) बताई गई है. दोनों दस्तावेजों में PMLA 2002 की धारा 50 के तहत जानकारी देने का उल्लेख है.
केजरीवाल को राहत के बाद विपक्ष हुआ आक्रामक
यह बयान उस समय आया है जब 27 फरवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को बरी कर दिया. अदालत ने CBI की जांच को “स्पेकुलेटिव” बताते हुए कहा कि कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ. हालांकि CBI ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है.
हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से राहत
हेमंत सोरेन का मामला कथित 8.86 एकड़ भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है. ED का दावा है कि यह जमीन अवैध रूप से प्राप्त की गई. सोरेन जनवरी 2024 में गिरफ्तार हुए थे और जून 2024 में उन्हें ज़मानत मिली. इसके बाद 25 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने ED की समन संबंधी कार्यवाही पर रोक लगाते हुए एजेंसी को नोटिस तलब किया.
JMM और AAP ने इन घटनाओं को जोड़ते हुए केंद्र पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है, जबकि BJP ने कहा है कि जांच स्वतंत्र है और अंतिम निर्णय अदालतों पर निर्भर करेगा.
