Jharkhand news: झारखण्ड की प्रचलित धार्मिक नगरी देवघर आस्था, परंपरा और दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के बीच सोमवार को डूब गयी. शहर के बाबा बैद्यनाथ धाम में सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने बाबा बैद्यनाथ को गुलाल अर्पित कर तीन दिवसीय होली उत्सव का ज़ोरों-शोरों से शुभारंभ किया. साथ ही साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्ति एवं उल्लास से सराबोर हो गया.

पालकी यात्रा की ध्वनियों से गूँज उठा शहर
मंदिर प्रशासनिक भवन स्थित राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर मंदिर की परिक्रमा कराई गई. इसके बाद पालकी पश्चिम द्वार से नगर भ्रमण के लिए निकली, जिस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप और “जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान और भक्तिमय हो उठा.
नगर के चौक-चौराहों पर मालपुआ का भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया. भ्रमण के पश्चात पालकी को आजाद चौक स्थित दोल मंच पर लाया गया, जहां भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा को झूले पर विराजमान कर भंडारी द्वारा झूला झुलाया गया.
मंगलवार को होगा हरि-हर मिलन
गौरतलब है कि मंगलवार के दिन हरि-हर मिलन होगा, जिसके उपलक्ष्य में पूरी रात मंदिर के पट खुले रखे जायेंगे, और श्रद्धालु रात भर दर्शन-पूजन कर सकेंगे. हरि-हर का अलौकिक दृश्य मंदिर के गर्भगृह से देखा जा सकेगा. श्रृंगार पूजन के बाद मंदिर पुनः खुलेगा और सुबह 10 बजे से आम भक्तों के लिए जलार्पण शुरू होगा. उल्लेखनीय बात यह है कि इसी दिन बाबा बैद्यनाथ का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है.
चंद्रग्रहण के कारण बदला पूजा क्रम
3 मार्च को शाम 5:47 बजे से 6:48 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा, जिसके मद्देनज़र शाम चार बजे मंदिर का पट बंद कर दिया जाएगा. इस्टेट पुरोहित ने मीडिया से बात-चीत के दौरान बताया कि बाबा बैद्यनाथ के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान होने के कारण यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाता.
ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण और वैदिक मंत्रोच्चार के पश्चात साढ़े सात बजे कपाट एक बार फिर खोले जाएंगे. पौराणिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा को हरि-हर मिलन की परंपरा आज भी यहाँ श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है.
