Jharkhand news: असम विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने चाय बागानों का दौरा कर सियासी पारा चढ़ा दिया है। दोनों नेताओं ने जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने की रणनीति के तहत गुरुवार को मजदूरों के बीच समय बिताया और उनकी समस्याओं को करीब से समझने का प्रयास किया।
चाय बागान पहुंचकर सीएम हेमंत और विधायक कल्पना सोरेन ने मजदूरों के साथ घुल-मिलकर चाय की पत्तियां तोड़ीं, उनके साथ बातचीत की और तस्वीरें भी खिंचवाईं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दृश्य चुनावी माहौल में एक अलग संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

मजदूरों के घर पहुंचे सीएम सोरेन, हालात देख जताई चिंता
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सोरेन एक चाय बागान मजदूर के कच्चे मकान तक पहुंचे। जानकारी के मुताबिक, घर में अंधेरा पसरा हुआ था, जहां मुख्यमंत्री सोरेन टॉर्च की रोशनी में अंदर गए और वहां की स्थिति देखकर हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि असम के चाय बागान मजदूरों की हालत बेहद चिंताजनक है और उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं विधायक कल्पना सोरेन ने चाय की पत्तियां तोड़ते हुए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं और चर्चा का विषय बनकर उभरीं हैं।
भाजपा सरकार पर सीएम सोरेन ने बोला तीखा हमला
मुख्यमंत्री सोरेन ने झारखंड की योजनाओं का हवाला देते हुए असम की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि झारखंड में ‘अबुआ आवास योजना’ के तहत गरीबों को पक्के मकान और कई क्षेत्रों में मुफ्त बिजली दी जा रही है, जबकि असम में आदिवासी और मजदूर वर्ग को इन सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यहां के आदिवासी समाज का केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है, लेकिन उनके जीवन स्तर में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
असम में सरकार बनने पर योजनाएं लागू करने का किया वादा
सीएम सोरेन ने दावा किया कि यदि असम में उनकी पार्टी JMM की सरकार बनती है, तो झारखंड की तर्ज पर जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएंगी। इस दौरान उन्होंने मजदूरों को बेहतर आवास, बिजली और सामाजिक सुरक्षा देने का आश्वासन भी दिया।
जमीनी जुड़ाव से वोट साधने की अपनाई जा रही रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सोरेन और कल्पना का यह दौरा महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए वरिष्ठ नेता सीधे आम लोगों के बीच पहुंचकर विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं।
