झारखंड मुक्ति मोर्चा असम: असम की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा की एंट्री के संकेत मिल रहे हैं. मोर्चा के अध्यक्ष और सीएम हेमंत सोरेन अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार को घेरने की तैयारी में हैं.

झारखंड मुक्ति मोर्चा असम: रणनीति पर काम करना शुरू
बता दें की असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले झामुमो ने आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.
झारखंड मुक्ति मोर्चा असम: चुनाव का सह प्रभारी नियुक्त किया
और इसे हेमंत सोरेन का ‘जवाबी वार’ माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने झारखंड में सक्रिय कैंपिंग की थी.. जिसके बाद भाजपा ने उन्हें चुनाव का सह प्रभारी नियुक्त किया था.
जमीनी हकीकत का आकलन करेगा
झामुमो की योजना के तहत मकर संक्रांति के बाद पार्टी का एक 4 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल असम रवाना होगा. यह दल असम के विभिन्न आदिवासी बहुल इलाकों का दौरा कर वहां की जमीनी हकीकत का आकलन करेगा..
बता दें की इस प्रतिनिधिमंडल में राजमहल से झामुमो सांसद विजय हांसदा, राज्य सरकार के मंत्री चमरा लिंडा, पार्टी विधायक भूषण तिर्की और एमटी राजा शामिल हैं.
भाजपा सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है
पार्टी का मानना है कि.. असम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं, लेकिन उन्हें अब तक संवैधानिक अधिकार और आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है. आदिवासियों की अनदेखी और उनके अधिकारों से वंचित रखना भाजपा सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है।
हिमंत बनाम हेमंत की राजनीतिक जंग
जानाकारी के अनुसार झारखंड चुनाव में भाजपा की ओर से हिमंत की सक्रिय भूमिका के बाद अब झामुमो उसी रणनीति को असम में दोहराने की तैयारी में है.
फर्क सिर्फ इतना है कि झामुमो आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय को हथियार बनाकर मैदान में उतर रहा है.
