Jawad Siddiqui MP connection : दिल्ली धमाका मामले में अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद सिद्दीकी का नाम उभरा है। जांच एजेंसियां उनके राजनीतिक और सामाजिक नेटवर्क की जांच कर रही हैं, खासकर उनके मध्य प्रदेश के महू से जुड़े पुराने रिश्तों की। जवाद सिद्दीकी ने 25 साल पहले महू छोड़कर दिल्ली-फरीदाबाद में अपना शैक्षणिक और व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया है।
जवाद सिद्दीकी का पृष्ठभूमि
जवाद सिद्दीकी अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन हैं और अलफलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उनका नाम दिल्ली धमाका मामले में तब आया जब जांच एजेंसियों ने अलफलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की और आरोपी डॉक्टरों का नाम भी सामने आया। जवाद सिद्दीकी के नेटवर्क और उनके द्वारा चलाए जा रहे शैक्षणिक संस्थानों पर जांच तेज हो गई है।
महू से जुड़ाव और पुराने नेटवर्क
जवाद सिद्दीकी का जन्म और बचपन महू में बीता है। 25 साल पहले वे यहां से दिल्ली आए और फरीदाबाद में अलफलाह यूनिवर्सिटी और अलफलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। जांच एजेंसियां अब उनके महू के पुराने दोस्तों, रिश्तेदारों और व्यापारिक संपर्कों की जांच कर रही हैं। यह जांच इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आरोपी डॉक्टरों के नेटवर्क में भी कुछ ऐसे लोग शामिल हैं जो महू और उसके आसपास के इलाकों से जुड़े हैं।
भाई पर भी महू में धोखाधड़ी का मामला
सूत्रों के मुताबिक, जवाद के भाई पर भी महू में धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली धमाके में जवाद सिद्दीकी का नाम सामने आने के बाद, महू पुलिस ने उसके पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
जांच की दिशा
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या जवाद सिद्दीकी के नेटवर्क ने आतंकवादी गतिविधियों को आश्रय दिया या उनके संस्थानों का इस्तेमाल किया गया। अलफलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस से बरामद विस्फोटक सामग्री और आरोपी डॉक्टरों के डिजिटल फुटप्रिंट जांच के लिए अहम सुराग बन रहे हैं। जवाद सिद्दीकी के पुराने नेटवर्क की जांच भी जारी है ताकि यह पता चल सके कि क्या उनके द्वारा बनाए गए नेटवर्क ने आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
जवाद सिद्दीकी के नेटवर्क और उनके द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों पर जांच तेज हो गई है। उनके महू के पुराने नेटवर्क की जांच भी जारी है ताकि यह पता चल सके कि क्या उनके द्वारा बनाए गए नेटवर्क ने आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया या उनके संस्थानों का इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियां इस मामले में और भी खुलासे कर सकती हैं।
