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जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने इस्तीफा दिया, जानिए PM पद की रेस में कौन?

himani Shrotiya September 7, 2025
Shigeru Ishiba Resignation: जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के भीतर विभाजन से बचने के लिए इस्तीफा दे दिया है। जापानी मीडिया NHK ने इस खबर की पुष्टि की है। इशिबा की गठबंधन सरकार को जुलाई 2025 में हुए ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उनकी स्थिति कमजोर हो गई थी। इस हार के लिए इशिबा ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और कहा था कि वह अपने भविष्य के कदम पर विचार करेंगे। उनके इस्तीफे की घोषणा ने जापान की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, और अब LDP में नई नेतृत्व की दौड़ शुरू होने की संभावना है।
 प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा
प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा

ऊपरी सदन में LDP की करारी हार

जुलाई 2025 में हुए ऊपरी सदन के चुनाव में इशिबा की LDP और उनके गठबंधन सहयोगी कोमेइतो को बहुमत हासिल करने के लिए 50 सीटों की जरूरत थी, लेकिन गठबंधन केवल 47 सीटें ही जीत सका। यह हार LDP के लिए एक बड़ा झटका थी, क्योंकि इससे पहले अक्टूबर 2024 में हुए निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के चुनाव में भी गठबंधन ने बहुमत खो दिया था। इस तरह, LDP अब जापान की संसद के दोनों सदनों में अल्पमत में है, जिसने इशिबा की सरकार की स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

चुनावी हार के बाद इशिबा ने शुरू में इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वह अमेरिका के साथ टैरिफ वार्ताओं को पूरा करने और बढ़ती कीमतों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने के लिए पद पर बने रहेंगे। हालांकि, LDP के भीतर और बाहर से उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई थी।

‘इशिबा को हटाओ’ आंदोलन

ऊपरी सदन के चुनाव में हार के बाद LDP के भीतर असंतोष की लहर दौड़ गई। पार्टी के कुछ प्रभावशाली नेताओं और सांसदों ने इशिबा के नेतृत्व पर सवाल उठाए। खास तौर पर, पूर्व प्रधानमंत्री तारो आसो, योशिहिदे सुगा और फुमियो किशिदा जैसे दिग्गज नेताओं ने इशिबा के साथ एक बैठक में उनकी स्थिति पर चर्चा की। इस बैठक में पार्टी के एकीकरण पर जोर दिया गया, लेकिन इशिबा के इस्तीफे का मुद्दा भी उठा।

पार्टी के कुछ युवा सांसदों, जैसे यासुताका नाकासोने के नेतृत्व में, एक याचिका अभियान शुरू किया गया, जिसमें इशिबा के जल्द इस्तीफे और नए नेतृत्व की मांग की गई। इसके अलावा, LDP के कुछ स्थानीय चैप्टर और पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के समर्थकों ने भी इशिबा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आबे के समर्थक इशिबा को रूढ़िवादी विचारधारा से कमजोर मानते थे और उनकी नीतियों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दे रहे थे।

इशिबा की स्थिति कमजोर होने के कारण

इशिबा की स्थिति कमजोर होने के कई कारण थे। सबसे पहले, उनकी सरकार को जनता का समर्थन लगातार कम हो रहा था। जुलाई 2025 में एक ओपिनियन पोल में उनकी सरकार की स्वीकृति दर केवल 23% थी, जो उनके कार्यकाल की सबसे निचली थी। इसके अलावा, LDP को हाल के वर्षों में कई घोटालों का सामना करना पड़ा, जिसमें धन उगाही घोटाला और यूनिफिकेशन चर्च से संबंध जैसे मुद्दे शामिल थे। इन घोटालों ने जनता का LDP के प्रति भरोसा कम कर दिया था।

दूसरा, इशिबा की कुछ नीतियां, जैसे कि चीन के साथ नरम रुख और चीनी पर्यटकों के लिए वीजा नियमों में ढील, LDP के भीतर विवाद का कारण बनीं। LDP के कुछ नेताओं, जैसे कोइची हागिउदा, ने उनकी नीतियों की आलोचना की और अधिक स्पष्टीकरण की मांग की। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ की वजह से जापानी जनता में नाराजगी बढ़ रही थी, और इशिबा की सरकार इसे प्रभावी ढंग से संबोधित करने में असमर्थ रही।

अमेरिकी टैरिफ और इशिबा की डील

जापान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ का बड़ा प्रभाव पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जापानी आयात, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में इशिबा की सरकार के साथ बातचीत के बाद 15% तक कम कर दिया गया। यह समझौता जुलाई 2025 में घोषित किया गया और इसे औपचारिक रूप से 4 सितंबर 2025 को लागू किया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इशिबा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इशिबा

इस समझौते को इशिबा ने अपनी एक बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन यह जनता और LDP के भीतर सभी को संतुष्ट नहीं कर सका। कई जापानी नागरिकों का मानना था कि टैरिफ के कारण उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही थी, क्योंकि चावल जैसे आवश्यक सामानों की कीमतें बढ़ रही थीं। इसके अलावा, विपक्षी दलों, जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी फॉर द पीपल और सनसेइतो, ने टैरिफ और बढ़ती कीमतों के खिलाफ जनता की नाराजगी को भुनाया और चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया।

Shigeru Ishiba Resignation: PM पद के दावेदार

इशिबा के इस्तीफे की घोषणा के बाद LDP में नई नेतृत्व की दौड़ शुरू होने की संभावना है। कई प्रमुख नेता इस रेस में शामिल हो सकते हैं, जिनमें निम्नलिखित नाम प्रमुख हैं:

  1. सनाए ताकाइची: पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री सनाए ताकाइची 2024 के LDP नेतृत्व चुनाव में इशिबा से हार गई थीं। वह रूढ़िवादी विचारधारा की समर्थक हैं और पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी सहयोगी रही हैं। ताकाइची को LDP के रूढ़िवादी धड़े और तारो आसो जैसे नेताओं का समर्थन प्राप्त है।
  2. शिंजिरो कोइजуми: पूर्व प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइजуми के बेटे शिंजिरो कोइजуми युवा और लोकप्रिय नेता हैं। वह 2024 के नेतृत्व चुनाव में भी दावेदार थे और उनकी सुधारवादी छवि जनता के बीच लोकप्रिय है।
  3. ताकायुकी कोबायाशी: पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री ताकायुकी कोबायाशी भी एक संभावित दावेदार हैं। वह युवा नेताओं में गिने जाते हैं और उनकी नीतियां रूढ़िवादी और आर्थिक सुधारों पर केंद्रित हैं।
  4. तोशिमित्सु मोतेगी: LDP के महासचिव और पूर्व विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भी नेतृत्व की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। वह अनुभवी नेता हैं और पार्टी के भीतर मजबूत समर्थन रखते हैं।

नेतृत्व परिवर्तन का प्रभाव

नए LDP नेता का चयन जापान की राजनीति और नीतियों पर गहरा प्रभाव डालेगा। नया प्रधानमंत्री न केवल घरेलू चुनौतियों, जैसे बढ़ती कीमतें और आर्थिक स्थिरता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, जैसे अमेरिका और चीन के साथ संबंध, को भी संभालना होगा।

LDP के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का भरोसा वापस जीतना होगा। हाल के घोटालों और चुनावी हार ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। नया नेता यदि सुधारवादी और पारदर्शी छवि के साथ सामने आता है, तो वह जनता के बीच LDP की स्थिति को मजबूत कर सकता है। इसके अलावा, विपक्षी दलों, जैसे सनसेइतो और डेमोक्रेटिक पार्टी फॉर द पीपल, के बढ़ते प्रभाव को रोकना भी एक चुनौती होगी।

जनता की नाराजगी

Shigeru Ishiba Resignation: चुनावी हार और इशिबा के इस्तीफे के पीछे जनता की नाराजगी एक बड़ा कारण रही। जापानी नागरिक बढ़ती कीमतों, खासकर चावल जैसे आवश्यक सामानों की कीमतों, से परेशान थे। इसके अलावा, युवा मतदाताओं का मानना था कि LDP की नीतियां बुजुर्गों पर अधिक केंद्रित हैं, जिससे उनकी उपेक्षा हो रही है।

नए दक्षिणपंथी दलों, जैसे सनसेइतो, ने इस नाराजगी का फायदा उठाया और “जापानी पहले” जैसे नारों के साथ युवा मतदाताओं को आकर्षित किया। सनसेइतो ने विदेशियों पर सख्त नीतियों और कर कटौती जैसे मुद्दों पर जोर दिया, जिसने LDP के वोट बैंक को प्रभावित किया।

About the Author

himani Shrotiya

Editor

हिमानी Nation Mirror में एसोसिएट प्रोड्यूसर पद पर है। राजनीति और क्राइम में काफी दिलचस्पी है। रिपोर्टिंग, एंकरिंग, स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग सब कर लेते है।

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