
दरगाह में पैगंबर मोहम्मद का बाल
हजरतबल दरगाह, जो पैगंबर मोहम्मद के पवित्र अवशेष (मोई-ए-मुक्कदस) के लिए जानी जाती है, में हाल ही में वक्फ बोर्ड द्वारा नवीकरण कार्य पूर्ण होने के बाद एक शिलापट्ट स्थापित की गई थी। इस शिलापट्ट पर भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ उकेरा गया था, जिसका उद्घाटन वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी ने किया। 3 सितंबर को, ईद-ए-मिलाद के अवसर पर जुमे की नमाज के बाद कुछ लोगों ने इस शिलापट्ट को पत्थरों से तोड़ दिया और वक्फ बोर्ड के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस्लाम में मूर्ति पूजा निषिद्ध है और अशोक स्तंभ जैसे प्रतीक को धार्मिक स्थल पर लगाना तौहीद (एकेश्वरवाद) के सिद्धांत के खिलाफ है।

Hazratbal Shrine Controversy: वक्फ बोर्ड ने क्या कहा?
वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन दरख्शां अंद्राबी, जो भाजपा नेता भी हैं, ने इस घटना को “आतंकी कृत्य” करार दिया और दोषियों के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “यह केवल पत्थर को नुकसान नहीं, बल्कि संविधान पर हमला है। जिन्हें राष्ट्रीय प्रतीक से परेशानी है, वे अपनी जेब में नोट भी न रखें, क्योंकि उस पर भी अशोक स्तंभ है।” अंद्राबी ने यह भी आरोप लगाया कि यह घटना राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (NC) के इशारे पर हुई, जिसे NC ने खारिज कर दिया।

राजनीतिक दलों का बयान
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना की निंदा की, लेकिन साथ ही शिलापट्ट पर अशोक स्तंभ लगाने की आवश्यकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा,
“मस्जिद, दरगाह, मंदिर या गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थल सरकारी संस्थान नहीं हैं। राष्ट्रीय प्रतीक का उपयोग केवल सरकारी कार्यों के लिए होना चाहिए। शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने हजरतबल को इसका वर्तमान स्वरूप दिया, क्या उन्होंने कभी ऐसी शिलापट्ट लगाई?”
खिरम दरगाह में फुटब्रिज उद्घाटन
4 सितंबर को अनंतनाग की खिरम दरगाह में एक फुटब्रिज का उद्घाटन हुआ। इस शिलापट्ट पर केवल वक्फ बोर्ड का लोगो था, अशोक स्तंभ नहीं। इस आयोजन में दरख्शां अंद्राबी भी शामिल हुईं। इस अंतर ने कई सवाल खड़े किए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि हजरतबल में अशोक स्तंभ को जानबूझकर शामिल किया गया ताकि धार्मिक भावनाएं भड़कें और राजनीतिक लाभ लिया जा सके। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता महबूबा मुफ्ती ने इसे “ईशनिंदा” करार देते हुए वक्फ बोर्ड को भंग करने और इसके अधिकारियों को हटाने की मांग की।
CCTV फुटेज
शिलापट्ट तोड़े जाने की घटना के बाद, श्रीनगर पुलिस ने निगीन थाने में FIR नंबर 76/2025 दर्ज की। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 300, 352, 191(2), 324 और 61(4) के साथ-साथ राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के बाद 26 लोगों को हिरासत में लिया। इन फुटेज में कुछ लोग शिलापट्ट को पत्थरों से तोड़ते और नारेबाजी करते दिखाई दिए। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी या भावनाओं में बहकर की गई हरकत।
राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर कानून
क्या थी साजिश?
हजरतबल और खिरम दरगाह की घटनाओं के बीच अंतर ने साजिश के आरोपों को हवा दी है। कुछ का मानना है कि अशोक स्तंभ को हजरतबल में शामिल करना एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि धार्मिक भावनाएं भड़कें और कश्मीर में अशांति फैले। NC और PDP ने वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इसे राष्ट्रीय सम्मान पर हमला बताया।
