विरोध करने वाले विधायकों को मार्शल ने बाहर निकाला
jammu kashmir assembly: श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गुरुवार को जबरदस्त हंगामा हुआ। राष्ट्रीय कांग्रेस (NC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के बीच तीखी बहस और झड़प हुई, जिससे सदन की कार्यवाही पूरी तरह से बाधित हो गई। यह घटनाक्रम तब हुआ जब भाजपा विधायक जम्मू जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसके लिए अनुमति नहीं दी।

भाजपा और NC विधायक भिड़े
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही, भाजपा विधायकों ने खड़े होकर प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग की और बाढ़ के मुद्दे पर आधे घंटे की चर्चा का अनुरोध किया। उनका कहना था कि जम्मू में भारी बारिश के कारण बाढ़ से हुई तबाही के कारण वहां के लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, और इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
लेकिन,
विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों की मांग पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इसके बाद, NC विधायक भी इस मुद्दे पर भाजपा का समर्थन करने लगे और स्थिति और भी बिगड़ गई। दोपहर तक दोनों पक्षों के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक और विरोध प्रदर्शन हुआ।
मार्शल्स ने विरोध करने वाले विधायकों को बाहर निकाला
जब सदन में बहस बढ़ी और हंगामा अधिक हुआ, तो विधानसभा अध्यक्ष ने यह आदेश दिया कि विरोध करने वाले विधायकों को सदन से बाहर निकाला जाए। इसके बाद, मार्शल्स को बुलाया गया और भाजपा तथा NC के विधायकों को सदन से बाहर कर दिया गया। इस कार्रवाई से विधानसभा की कार्यवाही में और भी अव्यवस्था पैदा हो गई, और कामकाजी माहौल पूरी तरह से प्रभावित हुआ।
इस घटनाक्रम के बाद,
विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। हालांकि, इस दौरान विपक्षी विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और बाढ़ पर चर्चा की मांग जारी रखी, लेकिन सदन में केवल सांसदों के मुद्दों पर चर्चा जारी रही।
विपक्ष का आरोप: सरकार का ध्यान नहीं
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि जम्मू और कश्मीर में बाढ़ जैसे गंभीर मुद्दे पर सरकार का ध्यान नहीं है। भाजपा के नेताओं का कहना था कि राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित इलाकों के पीड़ितों को तत्काल राहत देने में असमर्थ रही है। वहीं, NC विधायक भी सरकार की निंदा करते हुए कहते रहे कि यह संकट राज्य प्रशासन की नाकामी का परिणाम है। NC विधायक और भाजपा दोनों ही इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे, जबकि सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई से दोनों दलों के विधायकों में गुस्सा था, और सदन में मामला लगातार बिगड़ता चला गया।
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