Jal Ganga Enhancement: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज नव संवत्सर एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर इस्कॉन मंदिर, इंदौर के परिसर स्थित तालाब में गंगा जल अर्पित कर “जल गंगा संवर्धन अभियान” (तृतीय चरण) का शुभारंभ किया।

गुड़ी पड़वा से गंगा दशमी तक काम होगा-CM

आज से प्रारंभ हुए अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में जन सहभागिता से जल एवं जल स्रोतों के संरक्षण के लिए कार्य किए जाएंगे। अभियान का समापन 30 जून 2026 को होगा।
Jal Ganga Enhancement: इस अवसर पर सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा की गुड़ी पड़वा से गंगा दशमी तक काम होगा, मध्यप्रदेश नदियों का मायका है जल संरचनाओं को लेकर नहर तालाब प्राचीन जल स्रोत सभी व्यवस्था पर काम हुआ है ,ये हमारा तीसरा साल है जल गंगा संरक्षण अभियान के नाम से दौर से शुरुआत हो रही है ।
क्या है जल गंगा संवर्धन अभियान
जल गंगा संवर्धन अभियान में नदियों, तालाबों और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देने और भूजल स्तर बढ़ाने का एक सरकारी व जन-भागीदारी कार्यक्रम है। इसमें सफाई, पौधारोपण, और चेकडैम निर्माण के माध्यम से पानी बचाने पर फोकस किया जाता है।
इस अभियान को लेकर सीएम डॉ मोहन ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा ” मध्यप्रदेश ‘नदियों का मायका’ है। इसलिए हम सभी के लिए जल संरक्षण जिम्मेदारी भी है और संस्कार भी। बीते दो वर्षों में हम सभी ने मिलकर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त जन-आंदोलन बना दिया है। इस वर्ष भी उसी संकल्प और ऊर्जा के साथ अभियान को आगे बढ़ाना है।

इंदौर को दी अनेकों विकास कार्यों की सौगात
इंदौर वासियों को विकास कार्यों की सौगात देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में अमृत 2.0 परियोजना के अंतर्गत सिंगल क्लिक के माध्यम से 12.72 करोड़ लागत से बिलावली तालाब, 4.89 करोड़ लागत से लिम्बोदी तालाब, 3.82 करोड़ लागत से छोटा सिरपुर तालाब के जीर्णोद्धार कार्यों का भूमि-पूजन सहित कुल 22 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में जल की बर्बादी रोकने और एक-एक बूंद बचाने के लिए शपथ दिलवाई। ‘जल ही जीवन है, जल है तो कल है’ के मूल मंत्र के साथ जागरूकता फैलाना है। हमारी नदियां शरीर की रक्त धमनियों की तरह है, जो पृथ्वी माता को जीवन देती हैं। ब्रह्मांड में जल के महत्व से हम सभी परिचित हैं। अगर जीवन को सफल करना है तो प्राचीन समय के कुएं, नदियां, तालाब, बाबड़ी का जीर्णोद्धार करना है, जिनका सम्राट विक्रमादित्य, लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर, महाराज सिंधिया ने निर्माण कराया था। इंदौर में 21 बाबड़ियों का जीर्णोद्धार कराया गया है।
पराक्रम, पुरुषार्थ, और उत्सव की है हमारी संस्कृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति पराक्रम, पुरुषार्थ, आनंद और उत्सव की संस्कृति है। आज विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हो रहा है। आज का दिन सम्राट विक्रमादित्य का स्मरण करने वाला है। विक्रमादित्य ने अपनी वीरता, गंभीरता, दानशीलता और लोकप्रियता के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी। प्रकृति में ऋतुओं का राजा बसंत है और भारतीय नववर्ष के मौके पर चारों ओर बसंत की आकर्षक छटा दिखाई देती है। सनातन संस्कृति में मौसम, ऋतुओं और मंगल तिथियों के आधार पर पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं। इन तिथियों पर मंगल कार्य संपन्न किए जाते हैं।
