जयशंकर–अयाज सादिक हैंडशेक: ढाका में एक अंतिम संस्कार लेकिन कैमरों में कैद हुआ एक ऐसा पल जिसने दक्षिण एशिया की कूटनीति पर सबका ध्यान खींच लिया. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक दोनों जब आमने-सामने आए तो सिर्फ मुलाकात नहीं हुई हाथ भी मिला यही वजह है कि यह दृश्य साधारण नहीं माना जा रहा ।
जयशंकर–अयाज सादिक हैंडशेक: खालिदा जिया के जनाजे में आमना-सामना
डॉ. जयशंकर और अयाज सादिक दोनों ही बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका पहुंचे थे. इसी दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई और हाथ मिलाते हुए उनकी तस्वीर सामने आई इस तस्वीर को बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया, जिसके बाद यह चर्चा का विषय बन गई ।
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जयशंकर–अयाज सादिक हैंडशेक: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली ऐसी तस्वीर
भारत और पाकिस्तान के बीच मई महीने में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के किसी बड़े नेता ने सार्वजनिक रूप से न सिर्फ मुलाकात की, बल्कि हाथ भी मिलाया. इसी वजह से कूटनीतिक हलकों में इस मुलाकात को संकेतात्मक और संवेदनशील माना जा रहा है। भले ही बातचीत की कोई आधिकारिक जानकारी सामने न आई हो लेकिन यह दृश्य अपने आप में काफी कुछ कहता है ।
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क्रिकेट मैदान से कूटनीति तक का फर्क
इस मुलाकात की तुलना हाल के एशिया कप क्रिकेट विवाद से भी की जा रही है ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था जिस पर काफी बहस हुई थी । इतना ही नहीं, सीरीज जीतने के बाद भी टीम इंडिया ने ACC प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था. मोहसिन नकवी न सिर्फ PCB के चेयरमैन हैं, बल्कि पाकिस्तान सरकार में मंत्री भी हैं ।ऐसे माहौल में जयशंकर और सादिक का हाथ मिलाना अपने आप में अलग संदेश देता है।

खालिदा जिया को अंतिम विदाई: जनसैलाब उमड़ा
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को शाम करीब 5 बजे सुपुर्द-ए-खाक किया गया. उन्हें संसद परिसर स्थित जिया उद्यान में उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफनाया गया। उनके जनाजे में शामिल होने के लिए देशभर से करीब 10 लाख लोग पहुंचे, जिससे ढाका में अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ढाका में खालिदा जिया के बेटे से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शोक पत्र भी सौंपा इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों में संवेदनशीलता और सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है ।
