पाकिस्तान सरकार की मदद से PoK छोड़ रहे आतंकी
जैश-हिजबुल के आतंकी अब खैबर पख्तूनख्वा में ठिकाने बना रहे हैं
नई दिल्ली: भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की सफलताओं के बाद, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को असुरक्षित मानते हुए अब खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में नए ठिकाने बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की सरकारी संस्थाएं इन आतंकियों को PoK से खैबर की ओर शिफ्ट करने में मदद कर रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद PoK छोड़ रहे आतंकी
भारतीय डिफेंस सूत्रों ने बताया कि 7 मई 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के 7 शहरों में जैश और हिजबुल के ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन हमलों ने आतंकवादियों को इतना डरा दिया कि वे PoK से खैबर पख्तूनख्वा के सुरक्षित पहाड़ी इलाकों की ओर भाग रहे हैं। इस बदलाव में पाकिस्तान सरकार की मदद की बात भी सामने आई है, जहां स्थानीय सुरक्षा बलों और राजनीतिक-धार्मिक संगठनों की शह पर ये आतंकी गतिविधियाँ चल रही हैं।
पाकिस्तान सरकार का समर्थन
हाल ही में पाकिस्तान में कुछ स्थानों पर जैश-ए-मोहम्मद ने धार्मिक कार्यक्रमों के नाम पर भर्ती अभियान चलाया। विशेष रूप से 14 सितंबर 2025 को खैबर पख्तूनख्वा के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें जैश के सीनियर कमांडर मोलाना मुफ्ती मसूद इलियास कश्मीरी ने ओसामा बिन लादेन की तारीफ की। इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी पुलिस सुरक्षा में जैश के कई कैडर्स मौजूद थे, जो इस बात को स्पष्ट करते हैं कि पाकिस्तान सरकार का इन आतंकियों को संरक्षण मिल रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर: जैश-ए-मोहम्मद की प्रतिक्रिया
हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मौलाना मसूद अजहर के परिवार के मारे जाने की बात मानी है। जैश के एक कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को बहावलपुर में भारत के हमले में मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्य मारे गए। बहावलपुर में हुए हमले में मसूद की 10 रिश्तेदारों और चार सहयोगियों की मौत हो गई थी। यह घटना मसूद के लिए एक बड़ा झटका थी, हालांकि वह खुद हमले के वक्त वहां नहीं था, जिससे उसकी जान बच गई।

भारत की रणनीति और जैश की चुनौतियां
भारत ने अपने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के बहावलपुर, मुरीदके, और मुजफ्फराबाद जैसे शहरों में एयर स्ट्राइक की थी, जिससे आतंकी ठिकाने नष्ट हो गए थे। इसके बाद से जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन की गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन अब ये आतंकवादी संगठन खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में छिपकर अपनी रणनीतियां तैयार कर रहे हैं।
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