जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड ‘जमात-उल-मोमिनात’ से बढ़ा खतरा

jaish e mohammed women brigade: पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) एक बार फिर सुर्खियों में है इस बार एक नई रणनीति के साथ। संगठन ने अपनी पहली महिला ब्रिगेड ‘जमात-उल-मोमिनात’ के नाम पर ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन इसके पीछे का सच कहीं ज्यादा खतरनाक है।
महिला ब्रिगेड की आड़ में आतंकी भर्ती: jaish e mohammed women brigade
8 अक्टूबर से शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया को महिला सशक्तिकरण की आड़ में प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन असल में यह एक छद्म अभियान है, जिसके जरिए 1500 से ज्यादा युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल किया गया है।
संगठन की कमान सादिया अजहर के हाथ में
इस ब्रिगेड का नेतृत्व मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बहावलपुर, कराची और अन्य शहरों में धार्मिक शिक्षण केंद्रों के जरिए भर्ती की जा रही है। कमांडरों की पत्नियों और युवतियों को इस ब्रिगेड में शामिल किया जा रहा है
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति
भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश को भारी नुकसान हुआ था। कई वरिष्ठ सदस्य मारे गए, जिससे संगठन की संरचना कमजोर हुई। अब महिला ब्रिगेड के जरिए संगठन अपनी खोई ताकत वापस पाने की कोशिश कर रहा है।
100 करोड़ की फंडिंग जुटाई गई : jaish e mohammed women brigade
इस अभियान के लिए जैश ने करीब ₹100 करोड़ की फंडिंग जुटाई है। यह पैसा कथित तौर पर पाकिस्तान की सेना और कट्टरपंथी संगठनों की मदद से इकट्ठा किया गया है। इसका इस्तेमाल प्रशिक्षण, हथियारों और प्रचार सामग्री के लिए किया जा रहा है।
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