Jaisalmer Hospital: राजस्थान के जैसलमेर स्थित एकमात्र बड़े अस्पताल जवाहर चिकित्सालय की मोर्चरी की हालत इतनी खराब है कि यहां शव रखवाने की बजाय खुले में सड़ने पर मजबूर हैं। कोल्ड स्टोरेज की सुविधा न होने से शवों को बिना बर्फ के रखा जाता है, जिससे महज 48 घंटे में ही शव सड़ने लगते हैं और चारों तरफ भयंकर दुर्गंध फैल जाती है। हालात इतने गंभीर हैं कि लावारिस शवों की हालत और भी खराब हो जाती है, उनकी चमड़ी गल जाती है और उनमें कीड़े लग जाते हैं। नगर परिषद कर्मचारियों के लिए ऐसे सड़ते शवों को उठाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

Jaisalmer Hospital: बल्कि सबूत भी मिटने का खतरा रहता है
कई बार अस्पताल प्रशासन को शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन समाधान के कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए गए। मौजूदा मोर्चरी में महज दो शव रखने की ही व्यवस्था है, जबकि अक्सर 6-7 शव एक साथ रखने पड़ते हैं, जिससे चिकित्सालय को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थिति तब और बिगड़ जाती है, जब हत्या जैसे मामलों में पोस्टमार्टम में देर हो जाती है। डीप फ्रिज की कमी से शव जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे न सिर्फ शवों की स्थिति खराब होती है, बल्कि सबूत भी मिटने का खतरा रहता है।
Jaisalmer Hospital: डीप फ्रीजर का उपयोग संभव हो जाएगा
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए नगर परिषद जैसलमेर ने मोर्चरी के नवनिर्माण के लिए 33.25 लाख रुपये की राशि मंजूर की है। नई मोर्चरी का निर्माण कार्य आधे से ज्यादा पूरा हो चुका है। इस नई मोर्चरी में पोस्टमार्टम रूम, तीन बड़े कमरे, वेटिंग हॉल, बाथरूम, अत्याधुनिक उपकरण और छह शवों की क्षमता वाला डीप फ्रीजर शामिल होगा। हालांकि डीप फ्रीजर पहले ही अस्पताल में आ चुका है, लेकिन जगह की कमी के कारण उसे अब तक चालू नहीं किया जा सका है। नई मोर्चरी बनने के बाद डीप फ्रीजर का उपयोग संभव हो जाएगा।
सुधरेगी और परिजनों की परेशानियां कम होंगी
इसके अलावा, नई मोर्चरी में परिजनों के लिए भी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। अभी परिजनों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे वे गर्मी, सर्दी और बारिश में मोर्चरी के बाहर ही बैठे रहते हैं। नई मोर्चरी में 15×30 फीट का वेटिंग हॉल बनाया जा रहा है, जहां परिजन आराम से बैठ सकेंगे। उम्मीद है कि इस नई सुविधा से शवों के रखरखाव की व्यवस्था सुधरेगी और परिजनों की परेशानियां कम होंगी।
