Jaipur bus strike: सोमवार दोपहर जयपुर रोडवेज बस स्टैंड संघ के अध्यक्ष सुरेश शर्मा के नेतृत्व में 12 सदस्यीय बस संचालकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मिला। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को दो पन्नों का ज्ञापन सौंपा, जिसमें संचालकों की प्रमुख मांगें शामिल थीं। प्रमुख मांगों में मॉडिफाइड बसों को तत्काल जब्त करने की बजाय तीन महीने का सुधार मौका देना, चालान राशि में कमी करना और जैसलमेर हादसे के बाद शुरू किए गए अभियान में राहत देना शामिल है।

टैक्सी से सफर करना पड़ा
हड़ताल का असर आम जनता पर स्पष्ट रूप से पड़ा। सुबह-शाम ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। जयपुर के सिंधी कैंप बस अड्डे पर सोमवार सुबह 200 से ज्यादा यात्री बिना बस के फंसे रहे, जिन्हें ऊंचे किराए पर टैक्सी से सफर करना पड़ा।
बिना परमिट संचालन नियमों का उल्लंघन पाया गया
जैसलमेर हादसा इस हड़ताल की मुख्य वजह बना। 22 अक्टूबर को जैसलमेर में एक टूरिस्ट बस पलटने से 11 पर्यटकों की मौत हुई थी, जिसके बाद परिवहन विभाग ने राज्यभर में 500 से अधिक बसें जब्त कर ली थीं। विभाग का दावा है कि इन बसों में सीट बढ़ाना, फाइबर बॉडी और बिना परमिट संचालन नियमों का उल्लंघन पाया गया था।
Jaipur bus strike: मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि परिवहन मंत्री और सचिव के साथ शाम 5 बजे बैठक होगी। अगर सुधार का ठोस प्लान प्रस्तुत किया गया तो बसों को 30 दिन की मोहलत दी जा सकती है।
गंभीरता से देखें और स्थायी समाधान निकाला जाए
बस संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्की गोयल ने कहा कि हम सड़क सुरक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सभी बसों को अचानक बंद करना गलत है। अगर 15 हजार बसें बंद हो जाती हैं, तो 50 हजार ड्राइवर और कंडक्टर बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि संचालकों की समस्याओं को गंभीरता से देखें और स्थायी समाधान निकाला जाए।
रोजगार को भी संतुलित करना है
Jaipur bus strike: इस प्रकार बस संचालकों और सरकार के बीच संवाद जारी है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता और रोजगार को भी संतुलित करना है।
