jagannath snan rath yatra 2025 : 11 जून: भगवान जगन्नाथ का महास्नान- शुरू हुई पवित्र स्नान यात्रा
jagannath snan rath yatra 2025 : 11 जून को स्नान पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का भव्य महास्नान आयोजित हुआ। यह परंपरा उड़ीसा के पुरी स्थित विश्वविख्यात जगन्नाथ मंदिर में सदियों से निभाई जाती आ रही है।
इस विशेष स्नान को ‘स्नान यात्रा’ कहा जाता है, जो रथयात्रा से ठीक 15 दिन पहले होता है। यह वो एक दिन होता है जब भगवान खुले आम भक्तों को मंदिर के भीतर दर्शन देते हैं।
💧सोने के कुएं से जल, 108 कलशों से स्नान
पुरी मंदिर परिसर में स्थित सोने की ईंटों से बना कुआं, जिसे मंदिर के इतिहास में विशेष दर्जा प्राप्त है, से जल भरकर भगवानों को स्नान कराया जाता है।
🔸 108 चांदी और पीतल के कलशों में जल भरकर उसमें चंदन, कस्तूरी, केसर और जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं।
🔸 भगवान जगन्नाथ को 35, बलभद्र को 33, और सुभद्रा को 22 कलशों से स्नान कराया जाता है।
🔸 उन्हें सूती कपड़ों से लपेटा जाता है ताकि लकड़ी से बने विग्रह को नुकसान न पहुंचे।
😷 स्नान के बाद ‘बीमार’ क्यों हो जाते हैं भगवान?
यह सुनकर आश्चर्य हो सकता है, लेकिन परंपरा के अनुसार स्नान के बाद भगवान को ज्वर आ जाता है। इसे ‘अनवसर काल’ कहा जाता है।
👉 इस दौरान:
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मंदिर के पट 15 दिनों तक बंद रहते हैं (11 जून से 25 जून तक)
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भगवान को आराम देने के लिए उन्हें सूती वस्त्र, बिना आभूषण के पहनाए जाते हैं
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उन्हें फल, जूस और आयुर्वेदिक औषधियों का ही भोग लगाया जाता है
🧪 आयुर्वेदिक उपचार: कैसे ठीक होते हैं भगवान?
भगवान जगन्नाथ को स्वस्थ करने के लिए आयुर्वेदिक प्रक्रिया अपनाई जाती है:
🩺 5वें दिन: उड़िया मठ से लाया गया फुलेरी तेल शरीर पर लगाया जाता है
🩺 औषधीय काढ़ा: नीम, हल्दी, हरड़, बहेड़ा आदि से बना ‘दशमूलारिष्ट’ भगवान को अर्पित किया जाता है
🩺 21 जून: विशेष औषधियों से खलि लागि यानी शरीर पर लेप किया जाता है
📆 अनवसर पूजा का शेड्यूल:
| तारीख | आयोजन | विवरण |
|---|---|---|
| 11 जून | स्नान पूर्णिमा | भगवान का महास्नान, बीमार होने की शुरुआत |
| 16 जून | अनवसर पंचमी | फुलेरी तेल की मालिश |
| 20 जून | अनवसर दशमी | रत्न सिंहासन पर वापसी |
| 21 जून | खलि लागि | औषधियों का लेप |
| 25 जून | नवा सज्जा | विग्रह की मरम्मत और सजावट |
| 26 जून | नव यौवन दर्शन | रथयात्रा की अनुमति हेतु दर्शन |
| 27 जून | रथयात्रा | गुंडिचा यात्रा की शुरुआत |
🏛️ भारत भर में उल्लास: अहमदाबाद, काशी और भोपाल में भी स्नान यात्रा
पुरी के अलावा अहमदाबाद में भगवान को साबरमती नदी के जल से स्नान कराया गया, वहीं काशी में गंगा जल से।
🔹 अहमदाबाद में भव्य रथ सजाया गया और भक्तों ने डीजे, ढोल और नृत्य के साथ उत्सव मनाया।
🔹 उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माजी स्वयं स्नान यात्रा में शामिल हुए।
💎 रहस्य: सोने की ईंटों वाला कुआं
मंदिर के प्रांगण में मौजूद यह कुआं 4-5 फीट चौड़ा है, जिसमें पांड्य राजा इंद्रद्युम्न ने सोने की ईंटें लगवाई थीं। कहा जाता है कि इस कुएं में सभी तीर्थों का जल मौजूद है।
✅ इसका ढक्कन इतना भारी होता है कि 12-15 सेवकों को मिलकर उठाना पड़ता है।
✅ श्रद्धालु इस कुएं में सोने-चांदी की वस्तुएं अर्पित करते हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
🙏 रथयात्रा 2025: 27 जून को भगवान होंगे नगर भ्रमण पर
15 दिन के अनवसर के बाद 27 जून को गुंडिचा यात्रा यानी रथयात्रा का शुभारंभ होगा। भगवान तीन विशाल रथों में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे, जो भक्ति, आस्था और संस्कृति का अद्वितीय संगम होगा।

📣 भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, परंपरा और आध्यात्मिक विज्ञान का मिश्रण है। भगवान का ‘बीमार होना’ हमें यह सिखाता है कि ईश्वर भी विश्राम और उपचार के अधिकारी हैं, और भक्तों को उनकी सेवा में तन, मन और औषधि से समर्पित होना चाहिए।
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