भगवान अब 9 दिन मौसी के घर ठहरेंग
ओडिशा के पुरी में शनिवार को ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों भक्तों की मौजूदगी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ आज सफलतापूर्वक गुंडिचा मंदिर पहुंच गए।
गुंडिचा मंदिर को भगवान की “मौसी का घर” कहा जाता है, जहां तीनों भाई-बहन 9 दिनों तक विश्राम करेंगे।
तीनों रथों का आगमन: किसका रथ कब पहुंचा?
- 🛕 भगवान बलभद्र का ‘तालध्वज रथ’ सुबह 11:20 बजे गुंडिचा मंदिर पहुंचा
- 🛕 देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन रथ’ दोपहर 12:20 बजे पहुंचा
- 🛕 भगवान जगन्नाथ का ‘नंदीघोष रथ’ दोपहर 1:11 बजे मंदिर परिसर में पहुंचा
मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर की दूरी करीब 2.6 किलोमीटर है, लेकिन भारी भीड़ और सुरक्षा प्रबंधों की वजह से इसमें कई घंटे लगे।
हल्की बारिश बनी वरदान, पर भीड़ ने बढ़ाई चुनौती
पुरी में सुबह से रुक-रुक कर हल्की बारिश हो रही थी, जिससे मौसम खुशनुमा हो गया। हालांकि, भीड़ इतनी अधिक थी कि प्रशासन को भीड़ नियंत्रण में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
- शुक्रवार को रथ यात्रा के पहले दिन 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे
- शनिवार को भीड़ 10-20% कम रही, लेकिन अब भी लाखों भक्त मौजूद हैं
- भीड़ में धक्का-मुक्की के चलते शुक्रवार को 625 लोग बीमार हुए थे
- आज भी 650 से अधिक लोगों की तबीयत बिगड़ने की खबर है
- 70 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें 9 की हालत गंभीर है
गुंडिचा मंदिर में 9 दिन की विश्राम यात्रा
रथयात्रा का धार्मिक महत्व सिर्फ यात्रा में नहीं, बल्कि गुंडिचा मंदिर में भगवान का 9 दिन ठहराव भी बेहद पावन माना जाता है। इन नौ दिनों के दौरान यहां विशेष पूजा, भोग और अनुष्ठान किए जाते हैं।
इस प्रवास को “पारंपरिक विश्राम” और भक्तों के साथ अधिक समय बिताने का प्रतीक माना जाता है।
प्रशासन हाई अलर्ट पर
पुरी प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं:
- 100 से अधिक मेडिकल टीम
- 2000 से ज्यादा पुलिसकर्मी
- ड्रोन कैमरों से निगरानी
- 24×7 मेडिकल हेल्पलाइन सक्रिय
रथयात्रा का महत्व और मान्यता
जगन्नाथ रथयात्रा दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे भव्य रथ यात्राओं में से एक है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं और उन्हें दर्शन देते हैं।
यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेते हैं।
