50 अफसरों के नाम से कॉल कर की ठगी
मध्यप्रदेश के जबलपुर का रहने वाला एक ठग यूपी में पकड़ा गया है. उसपर तीन राज्यों में ठगी करने के आरोप हैं। वह खुद को लेडी आईपीएस अफसर बताते हुए थाना प्रभारियों से फोन पर महिलाओं की आवाज में करता था। कहता था कि ग्राहक सेवा केंद्र से इलीगल पैसा ट्रांसफर हो रहा है। जाकर देखो और मेरी बात करवाओ।
अफसर की आवाज में धमकाता था
उसकी बात मानकर टीआई ग्राहक सेवा केंद्र जाकर बात करा देते थे। वह ग्राहक सेवा केंद्र वालों से कहता था कि तुम्हें इस मामले में पुलिस अरेस्ट करेगी। अगर ऐसा नहीं चाहते हो तो एक क्यूआर कोड अपने स्टाफ के नंबर से भेज रही हूं। 10 हजार रुपए दे देना। ध्यान रहे अगर किसी से कहा तो सीधे जेल जाओगे।
आईपीएस अफसरों की हूबहू आवाज
महज 19 साल का ठग संकेत यादव सिर्फ 9वीं पास है। अब तक 50 से अधिक आईपीएस अफसरों की आवाज में राजस्थान और गुजरात में ठगी कर चुका है।पुलिस पूछताछ में उसने बताया कि उज्जैन में महाकाल मंदिर में साफ-सफाई का काम करने के दौरान वह अफसरों की बातें सुनता था। यहीं से उसने बातचीत के तौर-तरीके सीखे। फिर एक ग्राहक सेवा केंद्र पर काम किया तो पता चला कि वहां पर इलीगल पैसा ट्रांसफर होता है।
महाकाल मंदिर में करता था सफाई का काम
उत्तर प्रदेश की कासगंज पुलिस ने 15 जुलाई को जबलपुर के पाटन निवासी संकेत यादव को उस दौरान गिरफ्तार किया, जब इसने कासगंज एसपी अंकिता शर्मा की आवाज निकालकर मथुरा पुलिस को धोखा दिया।थापक मोहल्ले में रहने वाले संकेत के पिता उमाशंकर दिव्यांग हैं। मां पाटन में छोटी सी चाय की दुकान चलाती हैं। उसने 15 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था।वह 2021 में उज्जैन चला गया और महाकाल मंदिर में साफ-सफाई का काम करने लगा। जिस जगह वह काम करता था, वहां वीआईपी मूवमेंट के कारण पुलिस अक्सर तैनात रहती थी। इस दौरान उसने सीखा कि वरिष्ठ अधिकारियों से पुलिसकर्मी कैसे बात करते हैं।करीब 3 साल तक मंदिर में काम करने के बाद उसने उज्जैन में ही ग्राहक सेवा केंद्र में काम करना शुरू कर दिया। यहां उसने देखा कि इन सेंटर पर लोगों के पैसे जमा किए जाते हैं। यहां अच्छी खासी रकम भी एकत्रित होती है। 6 माह पहले वह जबलपुर लौट गया। वहां उसका मन नहीं लगा तो जॉब करने की बात कहकर घर से निकल गया।
वाट्सएप और ट्रू कॉलर पर लगाता था पुलिस की डीपी
संकेत सबसे पहले गूगल पर जिले में पदस्थ महिला पुलिस अधिकारी की डिटेल्स पता करता था। फिर एक नई सिम खरीदता था और महिला अफसर का फोटो गूगल से निकालकर ट्रू कॉलर और वाट्सएप की डीपी में लगा लेता था। इसके बाद दूसरे जिले के एसएचओ (टीआई) और चौकी प्रभारी को कॉल करता।मोबाइल पर महिला आईपीएस अधिकारी की फोटो, ट्रू-कॉलर में नाम आने के बाद एसएचओ भी एसपी समझते थे। वह टीआई को निर्देश देता कि तुम्हारे थाना क्षेत्र में एक इस नाम का ग्राहक सेवा केंद्र चल रहा है।
ऐसे आया पकड़ में
कासगंज एएसपी राजेश भारती ने बताया कि 8 जुलाई को सोशल मीडिया से पता चला कि एक व्यक्ति एसपी कासगंज अंकिता शर्मा की प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे मांग रहा है। उनकी आवाज की नकल कर पुलिस अधिकारियों को भी धमकी दे रहा था।साइबर थाना कासगंज में धारा 318 और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया और फिर 15 जुलाई को संकेत यादव को रेलवे स्टेशन कासगंज से गिरफ्तार किया जब वह यहां से भागने की फिराक में था। आरोपी इससे पहले कासगंज की पूर्व एसपी अपर्णा रजत कौशिक के नाम पर भी ठगी कर चुका है।संकेत यादव के कारनामे पता चलने पर अब मध्यप्रदेश पुलिस भी अलर्ट हो गई है, आशंका जताई जा रही है, कि हो सकता है आरोपी ने मध्यप्रदेश में महिला अधिकारियों के नाम पर ठगी की हो।
