सूर्य का अध्ययन करेगा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज प्रोबा-3 मिशन लॉन्च करेगा। इस मिशन को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिए बुधवार शाम चार बजकर आठ मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया जाना था, लेकिन इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया।
इसरो ने बताया कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से मिशन को अब गुरुवार यानी 5 दिसंबर की रात 4.16 बजे लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का है। इसका उद्देश्य दो उपग्रह कोरोनाग्राफ और ऑक्यूलर के माध्यम से सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करना है।
इसरो के पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल से लॉन्च किया जाएगा
दोनों उपग्रह एक-दूसरे से 150 मीटर की दूरी पर होंगे, दोनों उपग्रह पृथ्वी की अनुदैर्ध्य कक्षा में परिक्रमा करेंगे। पृथ्वी से इनकी अधिकतम दूरी 60,530 किमी और न्यूनतम दूरी करीब 600 किमी होगी। इस कक्षा में दोनों उपग्रह एक-दूसरे से 150 मीटर की दूरी बनाकर रख सकेंगे और एक इकाई की तरह काम करेंगे।
ऑकल्टर सैटेलाइट में 1.4-मीटर ओक्यूलेटिंग डिस्क है जिसे सूर्य की सबसे चमकीली डिस्क को काला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जिसके कारण कृत्रिम सूर्य ग्रहण लगता है। इस छाया के भीतर कोरोनाग्राफ उपग्रह अपनी दूरबीन से सौर कोरोना का निरीक्षण करेगा।
- प्रोबा -3 का प्राथमिक लक्ष्य अंतरिक्ष में मौसम की हमारी समझ को बढ़ाना है, जिसमें सौर तूफान और कोरोनल मास इजेक्शन शामिल हैं।
- इस मिशन में, अंतरिक्ष एजेंसी दो उपग्रहों के माध्यम से अपनी उन्नत गठन-उड़ान तकनीक को भी मान्य करना चाहती है।
- प्रोबा-3 के जरिए वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि कोरोना सूर्य की सतह से अधिक गर्म क्यों होता है और सौर हवा कैसे तीव्र हो जाती है।
