गर्भवती महिला की मौत के बाद नवजात भी नहीं बची
गाज़ा पट्टी में सोमवार को हुई इस्राइली फायरिंग और हवाई हमलों में कम से कम 78 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। मृतकों में एक गर्भवती महिला भी शामिल थी, जिसकी मौत के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन से बच्ची को जन्म तो दिया, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी भी मौत हो गई।

राहत के नाम पर गोलियां
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कई लोग उस समय मारे गए जब वे भोजन और सहायता लेने के लिए बाहर आए थे। एक राहत ट्रक के आसपास भीड़ जमा होने पर इस्राइली फोर्स ने फायरिंग की, जिसमें 25 से ज्यादा लोगों की जान गई। इनमें चार बच्चे भी शामिल थे। ये फायरिंग गाज़ा के दक्षिणी इलाके ख़ान यूनुस और रफ़ा के बीच बने सैन्य कॉरिडोर में हुई।
ऑपरेशन के बीच 10 घंटे का ‘ब्रेक’
गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए इस्राइल ने घोषणा की कि वह गाज़ा सिटी, देइर अल बलाह और मुवासी क्षेत्रों में रोजाना 10 घंटे तक सैन्य अभियान रोक देगा। इसके दौरान मदद के लिए सुरक्षित रूट तय किए गए हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों का कहना है कि यह काफी नहीं है।
यूएन के मुताबिक, गाज़ा में प्रतिदिन 500 600 ट्रकों की जरूरत है, जबकि अब भी सिर्फ 120 ट्रक अंदर जा पा रहे हैं। वहीं, इस्राइली सेना के मुताबिक, रविवार को 180 ट्रकों को अनुमति दी गई थी।

एयरड्रॉप: नाकाफी और खतरनाक
सोमवार को जॉर्डन और UAE की एयरफोर्स ने 17 टन राहत सामग्री गाज़ा में गिराई, जो कि एक ट्रक का हिस्सा भी नहीं भरती। राहत एजेंसियों ने एयरड्रॉप को “अप्रभावी और खतरनाक” बताया है, क्योंकि ये अक्सर युद्धग्रस्त इलाकों में गिरते हैं और जानलेवा साबित हो सकते हैं।
अस्पतालों में मातम
नासिर अस्पताल में पहुंची एक और स्ट्राइक की खबर के अनुसार, एक घर पर हमले में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें से आधे महिलाएं और बच्चे थे। अन्य क्षेत्रों में हुए हमलों में भी पांच से ज्यादा लोगों की जान गई।

60,000 से अधिक मौतें
गाज़ा हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार, इस्राइली कार्रवाई में अब तक 59,800 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। हालाँकि इस आंकड़े में नागरिक और आतंकियों के बीच अंतर नहीं किया गया है। संयुक्त राष्ट्र इस डाटा को विश्वसनीय मानता है।
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