israel sacks 1000 soldiers gaza war opposition : सैनिक बोले- अब यह जंग नहीं, राजनीतिक चाल है!
israel sacks 1000 soldiers gaza war opposition : इजराइली सेना IDF (Israel Defense Forces) ने लगभग 1000 रिजर्व सैनिकों को नौकरी से निकाल दिया है। यह फैसला इजराइल के सैन्य प्रमुख ईयार जमीर और वायुसेना द्वारा लिया गया है। बर्खास्त किए गए अधिकांश सैनिक वे हैं, जिन्होंने गाजा में चल रहे युद्ध को लेकर सरकार पर राजनीतिक उद्देश्यों को साधने का आरोप लगाया था।
😠 सैनिकों ने क्या कहा था?
इन सैनिकों ने इजराइल के प्रमुख अखबारों में सरकार के नाम खुला पत्र छपवाया था, जिसमें उन्होंने लिखा:
“गाजा में युद्ध अब किसी सैन्य उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहा। न तो हमास खत्म हुआ है, न ही बंधकों की रिहाई हो रही है। अब यह सिर्फ राजनीतिक एजेंडा बन गया है।”
इस पत्र पर सैकड़ों रिटायर्ड अधिकारियों और रिजर्व सैनिकों के हस्ताक्षर थे। इसमें यह भी चेतावनी दी गई थी कि अगर जंग ऐसे ही जारी रही, तो बंधक, सैनिक और निर्दोष नागरिक मारे जाएंगे।
🔥 इतनी बड़ी बर्खास्तगी पहली बार
इजराइली इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों को युद्ध पर सवाल उठाने के लिए बर्खास्त किया गया है। ज़्यादातर बर्खास्त किए गए सैनिक हाल ही में गाजा और लेबनान में ऑपरेशन का हिस्सा रहे हैं।
“हम गाजा में लड़ रहे थे, लेकिन अब हमें लग रहा है कि हम सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए बलिदान हो रहे हैं,” — एक बर्खास्त सैनिक ने इजराइली मीडिया को बताया।
📢 सरकार और सेना की प्रतिक्रिया
सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन IDF के सूत्रों ने कहा है कि “देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता”। उनका कहना है कि युद्ध के समय में सेना का विरोध करना “मनोबल तोड़ने वाला” कदम है।
📌 गाजा युद्ध की स्थिति
गाजा में इजराइल और हमास के बीच 18 महीने से संघर्ष चल रहा है। इजराइली सरकार का दावा है कि वे हमास को खत्म करने और बंधकों को छुड़ाने के लिए ऑपरेशन चला रही है, लेकिन ज़मीन पर स्थिति अलग नजर आ रही है:
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सैकड़ों बंधक अब भी हमास के कब्जे में हैं।
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हजारों नागरिक मारे जा चुके हैं।
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रिजर्व फोर्स पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
🤔 राजनीतिक मकसद की बहस तेज
सैनिकों के पत्र और बर्खास्तगी ने इजराइली राजनीति में तूफान ला दिया है। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सेना का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है।
“प्रधानमंत्री नेतन्याहू को देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बंद करना चाहिए,” — इजराइली विपक्ष के एक नेता ने बयान दिया।
📊 क्या यह लोकतंत्र पर खतरा है?
सैनिकों की बर्खास्तगी ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या लोकतंत्र में किसी सैनिक को युद्ध की आलोचना करने का हक नहीं है? क्या सवाल उठाना बगावत है?
इस पूरे घटनाक्रम ने इजराइल की सेना और सरकार के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गहराने वाला है।
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