israel iran war june 2025 – attack on nuclear sites : ईरान-इज़राइल युद्ध: 150 मिसाइलों से पलटवार, भारी तबाही
israel iran war june 2025 – attack on nuclear sites : तेल अवीव से तेहरान तक गूंजे धमाके
14 जून 2025 को मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की दहलीज़ पर पहुंच गया। इज़राइल ने शुक्रवार देर रात ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त एयरस्ट्राइक की। इसे “ऑपरेशन राइजिंग लायन” नाम दिया गया। इस हमले में 78 लोग मारे गए, जिनमें 6 वैज्ञानिक और 20 से ज्यादा सैन्य कमांडर शामिल थे।
जवाब में ईरान ने 150 बैलिस्टिक मिसाइलें इज़राइल पर दागीं। 6 मिसाइलें सीधे राजधानी तेल अवीव में गिरीं, जिससे भारी तबाही हुई। 2 नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 43 से ज्यादा लोग घायल हुए।
🔴 7 पॉइंट्स में समझिए पूरा घटनाक्रम
- इज़राइल ने 200 फाइटर जेट्स से ईरान के 100 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया।
- हमला ईरान के नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी से लेकर इस्फहान तक केंद्रित रहा।
- ईरान ने पलटवार में “ट्रू प्रॉमिस 3” ऑपरेशन लॉन्च किया।
- इज़राइल के रक्षा मंत्रालय को निशाना बनाने का दावा किया गया।
- अमेरिकी THAAD डिफेंस सिस्टम ने कुछ मिसाइलों को वायुमंडल के बाहर ही रोक लिया।
- इज़राइल ने ईरान के F-35 को मार गिराने का दावा किया, जबकि ईरान ने भी 2 इजराइली फाइटर जेट्स गिराने की बात कही।
- यूएन में चीन ने इज़राइली कार्रवाई की निंदा की और ईरान का समर्थन किया।
🟣 क्यों किया इज़राइल ने हमला?
इज़राइल का दावा है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था और उसने अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन किया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की गतिविधियों को खतरे के तौर पर देखा जा रहा था। इसके चलते मोसाद ने वर्षों तक तैयारी की और तीन चरणों में हमला किया।
पहले चरण में ड्रोन से रडार सिस्टम को निष्क्रिय किया गया। दूसरे में मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट किया गया और तीसरे में बमबारी से वैज्ञानिक ठिकानों को उड़ाया गया।
🟡 ईरानी जवाबी हमले ने मचाई तबाही
ईरान ने तुरंत पलटवार करते हुए ट्रू प्रॉमिस 3 ऑपरेशन शुरू किया।
इस ऑपरेशन की खास बातें:
- 150 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें इज़राइल पर दागी गईं
- तेल अवीव और सेंट्रल इज़राइल में कई इमारतें क्षतिग्रस्त
- 43 नागरिक घायल, कई की हालत गंभीर
- मेहराबाद एयरपोर्ट पर भीषण आग लगी
🟤 भारत और अमेरिका की भूमिका
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत कर हालात की जानकारी दी। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को होने वाली न्यूक्लियर डील की बातचीत रद्द हो गई है।
अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इज़राइल का साथ नहीं दिया, लेकिन THAAD सिस्टम के जरिए मिसाइल इंटरसेप्शन में मदद की।
🟢 चीन ने यूएन में क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में चीन के राजनयिक फू कांग ने इज़राइल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चीन ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और संघर्ष को बढ़ाने का विरोध करता है।
🟠 ईरान की नई सैन्य नियुक्तियां
इज़राइली हमले में कई टॉप ईरानी अधिकारी मारे गए। इसके बाद ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने नई नियुक्तियां की:
- मेजर जनरल मोहम्मद पाकपोर – IRGC के नए प्रमुख
- मेजर जनरल अब्दुलरहीम मौसवी – सेना के चीफ ऑफ स्टाफ
- जनरल अली शादमानी – सेनाओं के बीच तालमेल के लिए नियुक्त
🔴 क्या यह संघर्ष परमाणु युद्ध की ओर जा रहा है?
इस सवाल का जवाब फिलहाल असमंजस में है, लेकिन घटनाओं की तीव्रता यह इशारा कर रही है कि यदि वैश्विक ताकतों ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो ये टकराव क्षेत्रीय युद्ध से निकलकर वैश्विक संकट में तब्दील हो सकता है।
🟣 भारत को क्यों सतर्क रहना चाहिए?
- भारत के तेल और गैस आयात पर असर
- मध्य-पूर्व में बसे भारतीयों की सुरक्षा खतरे में
- कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
- भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति पर दबाव
✅ क्या अब बातचीत मुमकिन है?
ईरान-इज़राइल युद्ध अब केवल दो देशों की लड़ाई नहीं रही। यह अमेरिका, चीन, भारत जैसे देशों की नीतियों और मध्य-पूर्व की स्थिरता पर सीधा असर डाल रहा है। बातचीत की संभावना हर हमले के बाद और कम होती जा रही है।
यदि यूएन, अमेरिका और भारत जैसे देश सक्रिय पहल नहीं करते, तो यह संघर्ष आगे चलकर मानवता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
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