Israel Arrow-4 Missile System: येरूसलम से आई एक खबर ने पश्चिम एशिया की रणनीतिक तस्वीर को एक बार फिर बदलने का संकेत दे दिया है। इजरायल ने अपनी अगली पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइल एरो-4 को लगभग तैयार कर लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में इसका पहला फ्लाइट टेस्ट किया जा सकता है, और इसके साथ ही ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों पर इजरायल की पकड़ और मजबूत हो जाएगी।
Israel Arrow-4 Missile System: इजरायल-अमेरिका की साझा परियोजना
एरो-4 को Israel Aerospace Industries और US Missile Defense Agency मिलकर विकसित कर रहे हैं। यह वही एजेंसियां हैं, जिन्होंने पहले भी इजरायल के मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम को आकार दिया है.एरो-4 को खासतौर पर हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और उन बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है, जो उड़ान के दौरान अचानक दिशा बदल लेती हैं। यह मौजूदा एरो-2 सिस्टम की जगह लेगा, जो अब लगभग 30 साल पुराना हो चुका है।
Israel Arrow-4 Missile System: हवा और अंतरिक्ष, दोनों में कारगर
एरो-4 की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह वातावरण के भीतर (एंडो-एटमॉस्फेरिक) और अंतरिक्ष में (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) दोनों जगह इंटरसेप्शन कर सकता है। यानी मिसाइल चाहे ऊंचाई पर हो या अंतरिक्ष की दहलीज पर, यह सिस्टम उसे निशाना बना सकता है.डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हाइपरसोनिक हथियारों के दौर में यह क्षमता बेहद अहम हो जाती है, क्योंकि ये मिसाइलें पारंपरिक रडार और इंटरसेप्टर सिस्टम को अक्सर चकमा दे देती हैं।
क्या-क्या कर सकता है एरो-4
हाइपरसोनिक और घुमावदार लक्ष्यों पर वार
एरो-4 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर सकता है, जो उड़ान के दौरान दिशा बदलती रहती हैं। इसमें लगे छोटे विंगलेट्स इसे ज्यादा फुर्तीला बनाते हैं, जिससे यह तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है।
शूट-लुक-शूट सिद्धांत
यह सिस्टम “शूट-लुक-शूट” कॉन्सेप्ट पर काम करता है। यानी पहले लक्ष्य पर वार, फिर उसका आकलन, और जरूरत पड़ने पर दूसरा शॉट। इससे लक्ष्य को नष्ट करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
एडवांस सेंसर और AI
एरो-4 में अत्याधुनिक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एल्गोरिदम लगे हैं। ये असली वॉरहेड और डेकॉय (फर्जी मिसाइल) के बीच फर्क कर सकते हैं, जो हाल के संघर्षों में एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
हिट-टू-किल तकनीक
इसमें कोई विस्फोटक नहीं होता। यह सीधे टक्कर से लक्ष्य को नष्ट करता है, जिसे हिट-टू-किल टेक्नोलॉजी कहा जाता है।
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आगे क्या? एरो-5 की भी तैयारी
एरो-4 के लाइव ट्रायल्स के बाद इसे ऑपरेशनल किया जाएगा। इसके साथ-साथ इजरायल एरो-5 पर भी रिसर्च कर रहा है, जो पूरी तरह अंतरिक्ष में इंटरसेप्शन के लिए होगा.डिफेंस जानकारों के मुताबिक यह इजरायल की मिसाइल डिफेंस तकनीक में एक बड़ा कदम है, जो भविष्य के खतरों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
क्यों जरूरी हो गया एरो-4
इजरायल को ईरान, हिजबुल्लाह और अन्य दुश्मन संगठनों से लगातार मिसाइल हमलों का खतरा रहता है। बीते कुछ वर्षों में ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास का दावा किया है, जो मौजूदा डिफेंस सिस्टम को बेअसर कर सकती हैं.2024 के बाद ईरान के साथ हुए मिसाइल आदान-प्रदान में एरो सिस्टम ने करीब 85 प्रतिशत सफलता दिखाई, लेकिन बदलती तकनीक के दौर में अपग्रेड जरूरी माना जा रहा था। एरो-4 न सिर्फ इन नई मिसाइलों से निपटेगा, बल्कि सैचुरेशन अटैक्स यानी एक साथ दागी गई बड़ी संख्या में मिसाइलों के खतरे को भी कम करेगा.कुल मिलाकर, एरो-4 इजरायल की सुरक्षा रणनीति में एक ऐसा हथियार बनकर उभर रहा है, जो आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की सैन्य गणनाओं को प्रभावित कर सकता है।
