इजराइल के कतर में जुटे 50 मुस्लिम देश

कतर में इस्लामिक देशों की हुंकार: अब खामोश नहीं रहेंगे!
कतर की राजधानी दोहा में आज जो नज़ारा देखने को मिला, वो इतिहास के पन्नों में दर्ज किया जाएगा। 50 से ज्यादा मुस्लिम देशों के नेता एक मंच पर जमा हुए – एक मकसद के साथ: इजराइल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना।
ये बैठक अचानक नहीं बुलाई गई। इसके पीछे है 9 सितंबर का वह हमला, जब इजराइल ने दोहा में मौजूद हमास नेताओं पर मिसाइल स्ट्राइक की। इस हमले में 6 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक कतरी सुरक्षा अधिकारी भी शामिल था। इजराइल ने खुद हमले की ज़िम्मेदारी ली और कहा – हमास का कोई भी नेता दुनिया में कहीं भी सुरक्षित नहीं।
जब बातचीत के बीच ज़िंदगियां खत्म
गौर करने वाली बात ये है कि हमला उस समय हुआ, जब हमास की टीम अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए दोहा में मौजूद थी। यह घटना सिर्फ एक बमबारी नहीं थी, बल्कि सीधे कतर की संप्रभुता और मध्यस्थता की भूमिका पर हमला मानी जा रही है।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने इसे कायराना हमला करार देते हुए कहा —
हम अपनी जमीन पर ऐसे हमलों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। कतर अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
इजराइल से सारे रिश्ते तोड़ दो: ईरान की अपील
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बैठक में जोरदार भाषण देते हुए कहा —
अब वक्त आ गया है कि हर इस्लामिक देश इजराइल से अपने कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते तोड़े। यह सिर्फ हमास का नहीं, पूरे उम्माह का अपमान है।
ईरान की यह अपील सिर्फ भावनात्मक नहीं थी, बल्कि रणनीतिक रूप से मुस्लिम देशों को एक ब्लॉक में लाने की कोशिश थी। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश इजराइल से दोस्ती निभा रहे हैं, उन्हें इस्लामी एकता से बाहर मान लिया जाएगा।
पाकिस्तान का बड़ा प्रस्ताव: ‘इस्लामिक NATO’ बनाओ
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बयान पाकिस्तान की ओर से आया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मिलकर एक इस्लामिक जॉइंट डिफेंस फोर्स यानी मुस्लिम देशों की संयुक्त सेना बनाने का सुझाव रखा।
ख्वाजा आसिफ ने कहा
अब समय आ गया है कि हम NATO की तर्ज़ पर एक ऐसी फोर्स बनाएं, जो उम्माह पर होने वाले हर हमले का जवाब दे सके।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी
कोई ये न समझे कि गाजा युद्ध उससे दूर है। आज गाजा है, कल कोई और देश हो सकता है।
बंद कमरे की मीटिंग में क्या हुआ?
रविवार को दोहा में इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की बंद कमरे में अहम बैठक हुई। इस बैठक में कई फैसलों पर चर्चा हुई इजराइल के साथ व्यापार और कूटनीति खत्म करने के प्रस्ताव दिया संयुक्त सैन्य अभ्यास की योजना औरकतर की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता पर मुहर लगी । UN में इजराइल के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव लाने पर सहमति बनी.

बैठक के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार,
तुर्की, मलेशिया, इंडोनेशिया और ईरान ने पाकिस्तान के फोर्स प्रस्ताव का समर्थन किया है, जबकि कुछ खाड़ी देशों ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही।
इजराइल का पलटवार: हम डरने वाले नहीं
इस बैठक को प्रोपेगंडा स्टंट करार दिया। वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने कहा
हम आतंकवादियों के पीछे दुनिया के किसी भी कोने तक जाएंगे। चाहे वह कतर हो या कहीं और।
इजराइल के UN प्रतिनिधि डैनी डैनन ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा
हमास कोई राजनीतिक संगठन नहीं, बलात्कारियों और हत्यारों का गिरोह है। हम ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं रख सकते।
OIC और अरब लीग की भूमिका
इस बैठक का आयोजन OIC (Organization of Islamic Cooperation) और अरब लीग ने मिलकर किया। ये दोनों संगठन इस्लामी देशों के राजनीतिक और रणनीतिक हितों के लिए काम करते हैं।
- OIC में 57 मुस्लिम देश शामिल हैं।
- अरब लीग में 22 देश हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय एकता है।
इन संगठनों की आपातकालीन बैठक से इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है, और साथ ही पश्चिमी देशों के सामने भी डिप्लोमैटिक टेंशन पैदा हो सकती है।
क्या ये इस्लामिक वर्ल्ड यूनिटी की शुरुआत है?
इस बैठक ने एक बात तो साफ कर दी है अब मुस्लिम देश खामोश नहीं रहेंगे। क्या अरब देश इजराइल से रिश्ते तोड़ेंगे? क्या गाजा के युद्ध का दायरा अब मध्य-पूर्व से बाहर तक फैल जाएगा? अभी जवाब भले न मिले हों, लेकिन सवालों की गूंज बहुत तेज़ है।
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