भोपाल के ईरानी डेरा प्रकरण में अब जांच का दायरा आरोपियों से निकलकर जमानत दिलाने वालों तक पहुंच गया है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत दिलाने के मामले में दो अधिवक्ताओं और दो नोटरी सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ जालसाजी का प्रकरण दर्ज किया है। हैरानी की बात यह है कि जमानत के लिए जिस वृद्धा की बही लगाई गई, वह चलने-फिरने में भी असमर्थ है, जबकि एक अन्य बही मृत व्यक्ति के नाम पर पेश की गई थी.
मृत व्यक्ति के नाम पर ली गई जमानत
निशातपुरा थाना क्षेत्र की अमन कॉलोनी में ईरानी डेरा की महिलाओं द्वारा पुलिस पर हमले के मामले में चौदह आरोपियों की जमानत बेहद संदिग्ध तरीके से कराई गई थी। जांच में सामने आया कि एक बही अनवर जहां के नाम पर पेश की गई, जबकि वह अदालत पहुंची ही नहीं थी। उसकी जगह दूसरी महिला को खड़ा किया गया, जो खुद को अनवर जहां बताकर जमानत की प्रक्रिया में शामिल हुई.इतना ही नहीं, दूसरी बही अनवर जहां के पति जमी उर रहमान के नाम से लगाई गई, जिनका काफी समय पहले निधन हो चुका है। जनवरी के पहले सप्ताह में जब यह तथ्य सामने आया, तो पुलिस ने इसकी जानकारी न्यायालय को दी थी।
जमानत निरस्त, अब जालसाजी का केस
निशातपुरा थाना प्रभारी एसआई कमलेश चौहान के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच के बाद गुरुवार को जिला न्यायालय से कार्रवाई के आदेश मिले। इसके आधार पर अधिवक्ता नजर खान, अधिवक्ता मोहम्मद साजिद खान, नोटरी संजय कुमार और संदीप सराठे की भूमिका सामने आई, जिन पर चौदह महिलाओं की जमानत का इंतजाम करने का आरोप है.पुलिस की सक्रियता के चलते सभी आरोपियों की जमानत पहले ही निरस्त की जा चुकी है। अब फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर अलग से आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
अब वकील और नोटरी से होगी पूछताछ
पुलिस अब उन दो आरोपियों की तलाश में है, जिनकी जमानत फर्जी तरीके से कराई गई थी। इसके साथ ही दोनों अधिवक्ताओं और नोटरी से पूछताछ कर यह पता लगाया जाएगा कि अदालत के कठघरे में खड़ी महिला और मृत व्यक्ति के नाम पर गवाही देने वाला शख्स कौन था.पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये दस्तावेज पहले भी दो दर्जन से ज्यादा बार इस्तेमाल किए जा चुके हैं। अब यह भी खंगाला जा रहा है कि इन्हें पहले किन मामलों में और किसके लिए इस्तेमाल किया गया।
पूरा मामला
निशातपुरा पुलिस के अनुसार, 27 दिसंबर को काम्बिंग गश्त के दौरान ईरानी डेरा में पुलिस दल पर दो बार पथराव और मारपीट की गई थी। इस मामले में एक विधि विरोधी बालक सहित 17 पुरुष और 10 महिलाओं को आरोपी बनाया गया था.इन्हीं आरोपियों की फर्जी तरीके से जमानत कराई गई थी, जिसे लेकर अब न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है।फिलहाल चार नामजद और दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पूछताछ में और कितने चेहरे इस फर्जीवाड़े में बेनकाब होते हैं।
