अमेरिका का भारत पर एक्शन: 6 कंपनियों पर ईरान से तेल खरीदने का आरोप
iran oil sanctions india companies usa iran petroleum imports: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अपने विवादित “मेक्सिमम प्रेशर” नीति के तहत बड़ा कदम उठाया है। बुधवार रात को 24 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया गया, जिनमें 6 भारतीय कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां ईरान से प्रतिबंधित पेट्रोकेमिकल और रासायनिक उत्पादों की खरीद कर रही थीं।

अमेरिका के एक्शन का कारण
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ये कंपनियां ईरान से 2024 में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के उत्पाद यूएई के रास्ते मंगवा चुकी थीं। अमेरिका का आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को बढ़ाने और आतंकवाद को फंड देने में कर रहा है। आपको बता दें कि 2018 से ही अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जो अब तक जारी हैं।
अमेरिका ने अपनी नीति का नाम “मेक्सिमम प्रेशर” रखा है, जिसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक और सैन्य शक्ति को कमजोर करना है। इस रणनीति के तहत अमेरिका खासकर ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के व्यापार को निशाना बना रहा है।
iran oil sanctions india: कौन सी कंपनियां शामिल हैं?
अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित की गई 6 भारतीय कंपनियों में से हर एक पर आरोप है कि उन्होंने लाखों डॉलर की कीमत के ईरानी उत्पादों की खरीददारी की। ये कंपनियां बिना किसी क़ानूनी प्रक्रिया के इन उत्पादों को इकट्ठा करके अमेरिका के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रही थीं।
- अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी पर सबसे बड़ा आरोप है। इसने जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 के बीच 84 मिलियन डॉलर (करीब 700 करोड़ रुपए) से ज्यादा के ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पाद आयात किए।
- ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड: जुलाई 2024 से जनवरी 2025 के बीच कंपनी ने 51 मिलियन डॉलर (425 करोड़ रुपए) के ईरानी मेथनॉल और अन्य उत्पाद खरीदे।
- ज्यूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड: इसने भी ईरानी उत्पादों का करीब 49 मिलियन डॉलर का आयात किया।
- रमणिकलाल एस. गोसालिया एंड कंपनी: इसने करीब 22 मिलियन डॉलर के पेट्रोकेमिकल्स खरीदे।
- पर्सिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड: अक्टूबर से दिसंबर 2024 के बीच इस कंपनी ने 14 मिलियन डॉलर का ईरानी मेथेनॉल आयात किया।
- कंचन पॉलिमर्स: इस पर 1.3 मिलियन डॉलर के ईरानी पॉलीइथिलीन उत्पाद खरीदने का आरोप है।
क्यों हैं ये प्रतिबंध इतने महत्वपूर्ण?
यह कार्रवाई अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें ईरान को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अपने तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जो पैसा कमाता है, वह आतंकवादी संगठनों को फंडिंग देने में इस्तेमाल किया जाता है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य सजा देना नहीं है, बल्कि ईरान और अन्य कंपनियों के व्यवहार में बदलाव लाना है।

अमेरिका ने इन कंपनियों की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है, और अब कोई अमेरिकी नागरिक या कंपनी इन प्रतिबंधित कंपनियों के साथ व्यापार नहीं कर सकती। यही नहीं, यदि इन कंपनियों की किसी और कंपनी में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी है, तो वह भी इन प्रतिबंधों के तहत आ जाएगी।
भारत पर अमेरिकी दबाव: असर और भविष्य
अमेरिका का यह कदम भारत पर दबाव डालने की कोशिश है, क्योंकि भारत ईरान से तेल आयात करने वाला एक प्रमुख देश है। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया हो। फरवरी 2025 में भी अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिनका आरोप था कि वे ईरान के तेल व्यापार में सहायक हैं।
इन प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ईरान से तेल खरीदने के पक्ष में रहा है। हालांकि, यह प्रतिबंध भारतीय कंपनियों के लिए गंभीर चुनौती हो सकते हैं, क्योंकि यह उनके व्यापार के लिए बड़ा झटका हो सकता है, खासकर जब अमेरिकी बाजार और कंपनियां इनके संभावित भागीदार हों।
क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
भारत की सरकार को इन प्रतिबंधों के बीच अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करने के लिए अपनी रणनीतियां पर पुनर्विचार करना होगा। इसके अलावा, इन कंपनियों के लिए भी यह एक अहम मोड़ हो सकता है कि वे अपनी आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक पारदर्शी और कानूनी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
क्या भारत ईरान से तेल व्यापार जारी रखेगा?
अमेरिका द्वारा भारतीय कंपनियों पर लगाए गए ये प्रतिबंध केवल व्यापारिक प्रतिबंध नहीं हैं, बल्कि यह एक राजनैतिक संदेश भी है। भारत के लिए यह सवाल खड़ा होता है कि वह क्या अमेरिका के दबाव में आएगा या अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। ईरान से तेल आयात भारत के लिए काफ़ी अहम है, लेकिन इस मामले में संतुलन बनाना बहुत जरूरी होगा।
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