मिडिल ईस्ट की राजनीति में ऐसा तूफान शायद ही पहले देखा गया हो। ईरान की मीडिया एजेंसियों ने दावा किया है कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। कहा जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया और मलबे से शव बरामद किया गया। हालांकि ईरान सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ईरानी मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने कहा कि खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी इजराइली हमलों में मारे गए हैं।
ट्रम्प का दावा और वैश्विक प्रतिक्रिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर दावा किया कि “इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक मारा गया।” यह बयान जैसे आग में घी का काम कर गया।

उधर अमेरिकी चैनल CNN से बातचीत में इजराइली अधिकारियों ने कथित तौर पर शव की तस्वीर होने का दावा किया। कहा गया कि संयुक्त एयरस्ट्राइक में तेहरान स्थित आवास पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
लेकिन सच क्या है? यही सवाल पूरी दुनिया पूछ रही है।
तेहरान से तेल अवीव तक धमाकों की गूंज
शनिवार की रात मिडिल ईस्ट के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही। ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में धमाके हुए। जवाब में ईरान ने इजराइल के शहर तेल अवीव पर मिसाइलें दागीं। तेल अवीव में रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। गाड़ियां जलकर राख हो गईं। सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल दिखा।
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के मुताबिक अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत और 740 से अधिक घायल होने की खबर है। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की जान चली गई। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है। यह परिवारों का उजड़ना है। यह अधूरे सपनों की कहानी है।
ईरान का पलटवार, 9 देशों तक फैला तनाव
हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत नौ देशों को निशाना बनाने का दावा किया। करीब 400 मिसाइलें दागी गईं। कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की खबरें सामने आईं।
यूएई के शहर दुबई में ड्रोन हमले की सूचना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को और चिंतित कर दिया। बुर्ज खलीफा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रहा। इसका असर तेल बाजार से लेकर वैश्विक कूटनीति तक दिखने लगा है।
कौन थे खामेनेई
19 अप्रैल 1939 को मशहद में जन्मे खामेनेई ईरान की इस्लामी क्रांति के प्रमुख चेहरों में रहे। 1979 की क्रांति के बाद सत्ता के केंद्र में आए और 1989 में देश के सर्वोच्च नेता बने। उनके समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत स्तंभ मानते थे। आलोचक उन्हें कठोर और असहमति के प्रति सख्त शासक कहते रहे।
1981 में उन पर बम हमला हुआ था, जिसमें वे घायल हुए थे। लेकिन वे राजनीतिक रूप से और मजबूत होकर उभरे। आज अगर उनकी मौत की खबर सच साबित होती है, तो ईरान की राजनीति में एक युग का अंत माना जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदलेगा? क्या कूटनीति के रास्ते बंद हो चुके हैं?दुनिया की बड़ी ताकतें फिलहाल सतर्क हैं। संयुक्त राष्ट्र की ओर से संयम की अपील की गई है। लेकिन जमीनी हकीकत तनावपूर्ण है।
मिडिल ईस्ट पहले भी कई बार युद्ध की आग में जल चुका है। लेकिन इस बार हालात ज्यादा जटिल हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गुटबंदी और वैश्विक राजनीति सब इसमें उलझे हुए हैं। सच अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है। लेकिन एक बात साफ है। इस टकराव ने दुनिया को फिर याद दिलाया है कि शक्ति की राजनीति का अंत अक्सर आम लोगों की त्रासदी से होता है।
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