इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान का 71 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है, जिसकी अगुवाई संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं। इस दौरे से पहले गालिबाफ ने एक प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए विमान में उन बच्चों की तस्वीरें रखीं, जिनकी मौत हालिया संघर्ष में हुई थी।
ईरानी स्पीकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि “इस उड़ान में मेरे साथी मिनाब 168 हैं।” यह विमान विशेष रूप से उन बच्चों की स्मृति में नामित बताया जा रहा है, जिनकी मौत एक स्कूल पर हुए हमले में हुई थी।
भावनात्मक संदेश के पीछे राजनीतिक संकेत
रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान की खाली सीटों पर बच्चों की तस्वीरें, स्कूल बैग और जूते रखे गए थे। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन को ईरान की ओर से संघर्ष में मारे गए नागरिकों और बच्चों की पीड़ा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यह संदेश अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों पर सवाल उठाने के उद्देश्य से भी जुड़ा है।
इस्लामाबाद में हाई-लेवल वार्ता,तीन मुद्दों पर चर्चा
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता होने जा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।बैठक में मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर चर्चा होनी है, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे
तनाव और अविश्वास के बीच बातचीत
वार्ता से पहले ईरान के प्रतिनिधि गालिबाफ ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका पर पूर्ण भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पहले भी कई समझौतों का अनुभव असफल रहा है, जिससे संदेह बना हुआ है,दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष का रुख ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सख्त बताया जा रहा है।
होर्मुज संकट पर वैश्विक नजर
इस पूरी बातचीत के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट भी है, जहां हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी समझौते या असफलता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है.पाकिस्तान ने इस वार्ता को क्षेत्रीय शांति के लिए एक निर्णायक अवसर बताया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने भी सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है।
