International Yoga Day 2025: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2025) एक वैश्विक पर्व है जो प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे का इतिहास, इसके पीछे का उद्देश्य और कब से शुरु हुआ। इसके लाभों को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। आइए विस्तार से जानते हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 की 11वीं वर्षगांठ पर “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” यानी “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” थीम के तहत मनाया जाएगा। इस साल की थीम ये जाहिर करती है कि हमारी सेहत और धरती की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
International Yoga Day 2025: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत…
1. यह दिवस 21 जून को इसलिए चुना गया क्योंकि यह ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) का दिन होता है ‑ उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन, जो मन, शरीर और आत्मा में संतुलन का प्रतीक है ।
2. 2014 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए इसे प्रस्तावित किया। मात्र तीन महीनों में इसे 177 राष्ट्रों ने समर्थन दिया और 11 दिसंबर 2014 को इसे आधिकारिक रूप दे दिया गया
3. पहली बार इस दिवस को 21 जून 2015 को मनाया गया, जिसमें 35000 से अधिक लोग नेशनल स्टेडियम, दिल्ली में मुख्य कार्यक्रम के तहत शामिल हुए । प्रधानमंत्री मोदी स्वयं भी उस दिन योगाभ्यास में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में 21 तरह के योगासन 35 मिनट तक किये।
इसका वैश्विक महत्व…
1. इस पहल का मकसद केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, सामंजस्य और शांति का संदेश फैलाने की एक वैश्विक मुहिम भी है ।
2. दुनिया भर में हर साल सड़क, स्कूल, विश्वविद्यालय, राजधानियां, यहां तक कि सियाचिन जैसे कठिन जगहों पर भी औपचारिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं।
3. भारत में, इस दिन केंद्र सरकार और राज्य सरकारें विशेष आयोजन करती हैं, जैसे इस वर्ष कर्नाटक के कुरुक्षेत्र में एक लाख लोग स्वामी रामदेव के साथ योगाभ्यास करेंगे, और आंध्र प्रदेश में 5 लाख लोग सामूहिक योग करेंगे।

समाज व व्यक्ति पर असर…
1. शरीरिक स्वास्थ्य: लचीलापन, संतुलन और शक्ति बढ़ती है; जीवनशैली और मधुमेह जैसी बीमारियों पर नियंत्रण आता है।
2. मानसिक स्वास्थ्य: तनाव घटता है, ध्यान-एकाग्रता बढ़ती है और आत्म-स्थिति में सुधार करता है।
3. आध्यात्मिक विकास: योग मन, शरीर और आत्मा की एकात्मता का अनुभव कराता है—भीतरी शांति और संतुलन प्रदान करता है।
4. ग्लोबल प्रभाव: पहले आयोजन में भारत में 85 लाख से अधिक लोग और विश्व में करोड़ों लोग नियमित रूप से योग करने लगे।
11 प्रमुख योगासनों के नाम और benefits
1. ताड़ासन (Tadasana – Mountain Pose)
लाभ: मुद्रा सुधार, रीढ़ की लचीलापन और संतुलन को मजबूत करता है। यह सांस/दिय़ाफ्राम को खोलकर फेफड़ों की क्षमता भी बढ़ाता है।
2. वृक्षासन (Vrikshasana – Tree Pose)
लाभ: संतुलन, कोर स्थिरता और पैर की मांसपेशियाँ मजबूत करती है। एकाग्रता और मानसिक स्थिरता लाती है।
3. अधोमुख शिवानासन (Downward‑Facing Dog)
लाभ: हैमस्ट्रिंग्स, काफ़, कंधे, कोर की मजबूती के साथ स्ट्रेच करता है। तनाव, थकान और पीठ दर्द में लाभदायक है।
4. भुजंगासन (Bhujangasana – Cobra Pose)
लाभ: सीने खोलता है, रीढ़ की मांसपेशियों को ताकत देता है, पाचन और थायरॉइड स्वास्थ्य में मदद करता है।
5. धनुरासन (Dhanurasana – Bow Pose)
लाभ: पूरे शरीर को खींचता है, रीढ़, छाती, हाथ-पैर मजबूत करता है, साथ ही भूख को बढ़ाता है।
6. उष्ट्रासन (Ustrasana – Camel Pose)
लाभ: कमर, पेट और रीढ़ को खोलता है। अंगों के रक्त संचार में मदद करता है। Kidney stones में भी उपयोगी माना जाता है।
7. सेतुबंधासन (Setu Bandhasana – Bridge Pose)
लाभ: निचली पीठ, ग्लूट्स, और जांघों को मजबूत करता है; गर्भाशय, पाचन तंत्र और मूत्र प्रणाली पर सकारात्मक असर डालता है।
8. उत्तानासन (Uttanasana – Standing Forward Bend)
लाभ: हैमस्ट्रिंग्स, काफ़, कमर को खींचता है, तनाव कम करता है और नींद में सुधार लाता है।
9. पिजन पोज (Pigeon Pose)
लाभ: कूल्हों को खोलता है, पेल्विक लचीलेपन को बढ़ाता है, पीठ दर्द और तनाव में लाभ पहुंचाता है।
10. बल्लासन (Balasana – Child’s Pose)
लाभ: तनाव और थकान को दूर करता है, पीठ व गर्दन को आराम पहुँचाता है, ध्यान और विश्राम में मदद करता है।
11. आनंदबालासन (Ananda Balasana – Happy Baby Pose)
लाभ: गुदा, हैमस्ट्रिंग्स और निचली पीठ को हल्का स्ट्रेच देता है, पीठ दर्द में आराम देता है और मानसिक तनाव कम करता है।

अभ्यास के सुझाव
1. हर आसन को कम से कम 30–60 सेकंड तक रखें, धीरे-धीरे साँस की गहराई पर केंद्रित होकर।
2. कोमल स्ट्रेच और लुक-आउट: शुरुआत में विकास के अनुसार हो सकता है।
3. ध्यानपूर्वक रीढ़ की सुरक्षा और सांस की ताल पर काम करें।
