चीतों पर चर्चा के लिए दुनिया भर से पहुंचे वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट
अमेरिका, रशिया, यूनाइटेड किंगडम, नेपाल, केन्या और भारत के वाइल्डलाइफ से जुड़े हुए 400 वैज्ञानिक और स्टूडेंट जबलपुर में इकट्ठे हुए हैं. यह सभी वाइल्डलाइफ से जुड़े अनुभव एक दूसरे से साझा कर रहे हैं. इनके बीच में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय मध्य प्रदेश के कूनो अभ्यारण में दक्षिण अफ्रीका से लाए चीते ही रहे. मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ का कहना है कि हम गांधी सागर के बाद नौरादेही अभ्यारण्य में ले जाएंगे चीते.
कई देशों से आए वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट
मध्य प्रदेश सरकार के वन विभाग ने भारत के वाइल्डलाइफ से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक सम्मेलन का आयोजन किया है. जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ और फोरेंसिक हेल्थ केंद्र में यह आयोजन चल रहा है. जबलपुर के वेटरनरी कॉलेज में 3 दिनों तक भारत, नेपाल, यूनाइटेड स्टेट, यूनाइटेड किंगडम, केन्या और दूसरे कई देशों से वाइल्डलाइफ के वैज्ञानिक और छात्र जबलपुर पहुंचे हैं.
एक दूसरे से कर रहे अनुभव साझा
यह सभी वन्य जीव प्राणी विशेषज्ञ अपने-अपने काम में माहिर लोग हैं. इन सभी ने किसी न किसी वन्य जीव के जीवन पर काम किया है और यह सभी अपने काम को ऑडियो विजुअल तरीके से एक दूसरे को बता रहे हैं, ताकि इस ज्ञान का फायदा दूसरे वैज्ञानिकों के साथ वाइल्डलाइफ का अध्ययन करने वाले छात्र भी उठा सकें.
चीता पर हुई चर्चा
इस आयोजन में मध्य प्रदेश के चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट शुभरंजन सेन भी शामिल हुए. मध्य प्रदेश के वन्य जीव प्राणी विशेषज्ञों ने चीतों की सक्सेस स्टोरी पूरी दुनिया के वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट के सामने रखी. चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट शुभरंजन सेन ने बताया कि “मध्य प्रदेश में दक्षिण अफ्रीका के चीतों को सफलतापूर्वक बसाया जा चुका है. मध्य प्रदेश वन विभाग धीरे-धीरे इनका क्षेत्र भी बढ़ा है. फिलहाल चीतों को कूनो के अलावा गांधी सागर अभ्यारण भेजा जा रहा है. अगले चरण में हम नौरादेही में भी चीतों को बसाएंगे.”
चीतों के लिए सबसे अच्छी जगह मध्य प्रदेश’
चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट शुभरंजन सेन का कहना है कि “मध्य प्रदेश बिग कैट्स के लिए सबसे अच्छी जगह है. इसलिए यहां टाइगर्स की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. 2022 में मध्य प्रदेश में टाइगर की गणना की गई थी. इसमें केवल मध्य प्रदेश में 785 बाघ हो चुके थे. अब हमारी चुनौती इन्हें अपने परंपरागत जंगलों से निकालकर नए जंगलों में बसाने की है. अभी हमने कुछ बाघ दूसरे जंगलों में बसाए हैं क्योंकि परंपरागत जंगलों में बाघ बढ़ रहे हैं और भी जंगल के साथ इंसानी बस्तियों में भी देखे जाने लगे हैं.”
‘चीते और बाघ रह सकते हैं साथ
चीतों और बाघों को एक साथ एक ही अभ्यारण में रखने की भी तैयारी है. इसमें एक सवाल यह उठता है कि कहीं ऐसा ना हो कि यह दोनों ही आपस में टेरिटरी फाइट करने लगे. इस मामले में
शुभरंजन सेन का कहना है कि “ऐसी संभावना नहीं है क्योंकि पहले भी शेर, चीता, तेंदुआ जैसी बड़ी बिल्लियां एक साथ एक ही जंगल में रहती रही हैं.”
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने सुनाए अनुभव
यह सम्मेलन वन्य प्राणी विशेषज्ञों के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है. इसमें जयपुर के एक वैज्ञानिक ने बताया कि किस तरह उन्होंने छोटे-छोटे अनाथ बाघ के बच्चों को पालकर बड़ा किया. दक्षिण भारत से आईं एक वन्य प्राणी विशेषज्ञ ने बताया कि हाईना को बचाने में उन्होंने किन दवाइयां का इस्तेमाल किया और एक हाईना को स्वस्थ करके वापस जंगल में छोड़ा. इसी तरह पूरे दिन वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट ने अपनी-अपने अनुभव एक दूसरे से साझा किए.
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