International Tea Day: चाय ऐसी ड्रिंक है, जो हर दिन सुबह की शुरुआत हो या किसी शाम की थकान, भारत में लोगों की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि इस पसंदीदा ड्रिंक को वैश्विक स्तर पर मान्यता देने के लिए एक दिन भी तय किया गया है? जी हां, अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस हर साल 21 मई को मनाया जाता है। यह दिन न सिर्फ चाय के स्वाद का जश्न है, बल्कि इसके उत्पादन से जुड़े लाखों श्रमिकों, किसानों और उद्योगों के अधिकारों और योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से शुरु किया गया है।
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आपको बता दें कि, भारत में हर दिन लगभग 13 करोड़ चाय की प्याली बिकती हैं। अगर एक प्याली की औसत कीमत 10 रुपए माने तो देश में लगभग 130 करोड़ रुपए की चाय बेची जाती है।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस किस उद्देश्य से हुआ शुरू
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस हर साल 21 मई को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य चाय की खेती, उत्पादन, और वितरण से जुड़े सभी लोगों के योगदान को पहचान देना और उनके जीवन में सुधार के लिए वैश्विक जागरूकता फैलाना है।

इस दिन को मनाने का एक और अहम मकसद चाय के न्यायसंगत व्यापार (Fair Trade) को बढ़ावा देना है ताकि छोटे किसान और श्रमिकों को उनके अधिकार मिल सकें और उन्हें शोषण से बचाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
इस दिन की नींव भारत में रखी गई थी, जहां चाय की खेती और इसका व्यवसाय एक बड़ी आबादी की रोजी-रोटी का साधन है। सबसे पहले 2005 में भारत के चाय संगठनों ने इस दिन को मनाने की पहल की। 2005 से लेकर 2019 तक, कई चाय उत्पादक देशों जैसे श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, वियतनाम, इंडोनेशिया, केन्या, और मलावी में इस दिन को 15 दिसंबर को मनाया जाता था।
हालांकि, साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने इस प्रयास को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी और तय किया कि यह दिन हर साल 21 मई को मनाया जाएगा। इसका प्रस्ताव भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के सामने रखा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई।
भारत में चाय का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व
भारत में चाय का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा है, जब अंग्रेजों ने असम और दार्जिलिंग में चाय की खेती शुरू की थी। धीरे-धीरे यह पेय भारत की संस्कृति का हिस्सा बन गया। आज देश के हर कोने में चाय की अलग-अलग किस्में और परंपराएं देखने को मिलती हैं — कटिंग चाय, कुल्हड़ चाय, मसाला चाय, अदरक वाली चाय और ग्रीन टी।
चाय अब केवल एक पेय नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बन चुका है — चाहे रेलवे स्टेशन हो या ऑफिस का ब्रेक टाइम, हर जगह चाय अपनी जगह बनाए हुए है।
21 मई की तारीख क्यों चुनी गई?
संयुक्त राष्ट्र ने जब इसे आधिकारिक रूप से घोषित किया, तो 21 मई की तारीख को इसलिए चुना गया, क्योंकि यह दुनिया के अधिकांश चाय उत्पादक देशों में चाय की फसल के मौसम की शुरुआत का समय होता है। इस समय चाय की पहली और सबसे अच्छी पत्तियां तोड़ी जाती हैं, जिसे ‘फर्स्ट फ्लश’ कहा जाता है।
भारत की भूमिका और योगदान..
विश्व में भारत चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, इस दिवस को शुरू करवाने में भारत सबसे आगे रहा। भारत में असम, दार्जिलिंग, नीलगिरी जैसे क्षेत्र दुनिया में सबसे प्रसिद्ध चाय उत्पादक क्षेत्र माने जाते हैं। भारत में लगभग 1 करोड़ से अधिक लोग सीधे या परोक्ष रूप से चाय उद्योग से जुड़े हुए हैं।

भारत सरकार ने चाय उद्योग के प्रति बढ़ती अंतरराष्ट्रीय जागरूकता और किसानों की स्थिति सुधारने के लिए 2004-05 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में कई देशों का समर्थन मिला।
विश्व में चाय का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
चाय केवल भारत ही नहीं, बल्कि चीन, श्रीलंका, केन्या, इंडोनेशिया, जापान, वियतनाम और कई अफ्रीकी देशों की भी प्रमुख कृषि फसल है। चाय उत्पादन से जुड़ी पूरी दुनिया में करोड़ों लोग अपनी आजीविका चलाते हैं। इसके साथ-साथ चाय का कारोबार अरबों डॉलर का है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है।
आज कैसे मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस?
आज के समय में यह दिवस पूरे विश्व में वेबिनार, सेमिनार, सोशल मीडिया अभियान, चाय प्रदर्शनी, और ट्रेड शो के माध्यम से मनाया जाता है। इसमें चाय के नए फ्लेवर, हेल्थ बेनिफिट्स, और खेती की आधुनिक तकनीकों पर चर्चा होती है।

भारत में खास तौर पर असम, पश्चिम बंगाल, और तमिलनाडु के चाय बागानों में इस दिन को उत्सव की तरह मनाया जाता है।
